)
सिराज माही/नई दिल्ली: मकबूल फिदा हुस्सैन (Maqbool Fida Husain) का नाम दुनिया के सबसे बड़े चित्रकारों में शुमार होता है. एम एफ हुसैन का पहला प्यार सिनेमा था. यही वजह थी कि वह मुंबई में अदाकार बनने के लिए गए थे. उन्हें फिल्मों में काम करने का कम ही मौका मिला. वह फिल्मों के बैनर पेंट करते थे. एम एफ हुसैन का यह काम फिल्म जगत के लोगों को बहुत पसंद आया. 1940 के दौर में एम एफ हुसैन फिल्मों के बैनर पेंट करने के लिए मशहूर हुए.

एम एफ हुसैन 'धक धक गर्ल' माधुरी के बड़े फैन थे. उन्होंने माधुरी दीक्षित और तब्बू के साथ फिल्में भी बनाईं.
क्यों छोड़ना पड़ा भारत?
आज ही के दिन साल 2010 में एम एफ हुसैन को क़तर ने अपने यहां की नागरिकता दी थी. दरअसल एम एफ हुसैन को साल 2006 में अपनी पेंटिंग के चलते भारत छोड़ देना पड़ा था. दरअसल हुसैन को हिंदू देवियों दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की नग्न पेटिंग बनाने के लिए अलोचना का सामना करना पड़ा. उनके खिलाफ भारत में कई जगह प्रदर्शन हुए. उन पर आरोप लगे कि उन्होंने अश्लील पेंटिंग बनाई हैं. हुसैन के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों से कई आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए. इसके बाद हुसैन ने भारत छोड़ दिया. विवादित पेंटिंग बनाने के ताल्लुक से हुसैन से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि "इसका जवाब अजंता और महाबलीपुरम के मंदिरों में है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जो अपना ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया है, उसे पढ़ लीजिए. मैं सिर्फ़ कला के लिए जवाबदेह हूँ और कला सार्वभौमिक है. नटराज की जो छवि है, वो सिर्फ़ भारत के लिए नहीं है, सारी दुनिया के लिए है. महाभारत को सिर्फ़ संत साधुओं के लिए नहीं लिखा गया है. उस पर पूरी दुनिया का हक़ है."

नंगे पैर रहते थे हुसैन
एम एफ हुसैन के बारे में एक और किस्सा बहुत मशहूर है कि वह नंगे पैर रहते थे. बताया जाता है कि एम एफ हुसैन ने साल 1963 में चप्पल जूते पहनना बंद कर दिया था.एम एफ हुसैन बताते हैं कि "मुक्तिबोध हिंदी के बहुत मशहूर कवि हुआ करते थे. वे मेरे दोस्त थे. मैंने उनका एक चित्र भी बनाया था. जब उनका देहांत हुआ तो मैं उनके पार्थिव शरीर के साथ श्मशान घाट गया था. मैंने उसी समय अपनी चप्पलें उतार दी थीं, क्योंकि मैं ज़मीन की तपन को महसूस करना चाहता था. मेरे ज़हन में एक और ख़्याल आया था- वो करबला का था. इसकी एक और कहानी भी है. मेरी मां का देहांत उस वक्त हुआ था, जब मैं सिर्फ़ डेढ़ साल का था. मेरे पिताजी कहा करते थे कि मेरे पैर मेरी माँ की तरह दिखते हैं. मैंने कहा तब उस पैर में जूते क्यों पहनूँ?"

9 जून साल 2011 को मक़बूल फ़िदा हुसैन ने लंदन में आखिरी सांस ली.
Video: