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नई दिल्ली: लीबिया में दहशतगर्दों ने कुछ दिन पहले सात हिंदुस्तानी शहरियों को अग़वा किया था जिसके बाद उन्होंने सातों हिंदुस्तानी शहरियों की रिहाई के लिए 20 हजार डॉलर की फिरौती मांगी थी. इसी सिलसिले में ख़बर मौसूल हो रही है कि सातों हिंदुस्तानी अभी भी ज़िंदा हैं और सरकार उनकी रिहाई और मुल्क वापसी के लिए हर मुमकिन कोशिशें कर रही है.
वज़ारते ख़ारिजा के तरजुमान अनुराग श्रीवास्तव ने सहाफ़ियों से बात करते हए कहा कि सातों हिंदुस्तानी शहरियों को उस वक़्त अग़वा कर लिया गया था जब वो गुज़िश्ता महीने 14 सितंबर को मुल्क वापस आने के लिए लीबियाई एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. सभी सात अफ़राद तामीराती काम में मुलाज़िम के तौर पर काम कर रहे थे, ये सभी सातों अफ़राद आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश बिहार और गुजरात से ताल्लुक़ रखते हैं.
अनुराग श्रीवास्तव ने आगे कहा कि ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनिस में हिंदुस्तानी सिफ़ारत ख़ाना और वहां काम करने वाले आलमी तंज़ीमों और इम्लायर्स से राब्ता कायम करके अग़वा होने वाले सातों अफ़राद का पता लगाने की कोशिशें की गईं हैं. उन्होंने बताया कि कुछ तस्वीरों से पता चला है कि सातों अग़वा शुदा अफ़राद अब भी ज़िंदा हैं. हिंदुस्तानी अफ़सरान उनके अहले खाना के राब्ते में हैं और उनकी रिहाई के लिए पूरी कोशिश की जा रही है.
वाज़ेह रहे कि हुंकूमते हिंद की जानिब से साल 2016 में एक एडवाइज़री जारी की गई थी जिसके मुताबिक किसी आम हिंदुस्तानी शहरी के लीबिया दौरे पर मुकम्मल पाबंदी लगाई गई थी और वो पाबंदी अब भी जारी है. लीबिया के सफ़र पर मुकम्मल पाबंदी लगने के बाद भी हिंदुस्तान से लीबिया आना जाना मुसलसल जारी है. हुकूमते हिंद को इस तरफ़ मज़ीद तवज्जोह देने की ज़रूरत है. ताकि कोई बेला ज़रूरत लीबिया ने जाए और इस तरह की परेशानी में मुब्तला ने हो.
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