)
नई दिल्लीः आर्थिक संकट की मार और बढ़ती महंगाई की वजह से पाकिस्तान के हालात बेहद नाजुक हैं, लेकिन इस देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके पास अवैध रूप से जमा की गई बेशुमार दौलत है और यह स्विस बैंक में जमा (Suisse Bank Leak Data) है. स्विस बैंक से लीक एक डेटा में करीब 1400 पाकिस्तानी नागरिकों से जुड़े 600 खातों के बारे में पता चला( 600 Pakistani Nationals Accounts in Swiss Banks) है. डेटा लीक ने आर्थिक रूप से कंगाली की हालत में खड़े पाकिस्तान में खलबली मचा दी है. द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा में उन खातों की जानकारी भी है, जो अब बंद हो चुके हैं लेकिन अतीत में चालू रहे हैं.
दरअसल, स्विट्जरलैंड में पंजीकृत एक निवेश बैंकिंग फर्म क्रेडिट सुइस से लीक हुए आंकड़ों ने 128 देशों में इसके धनी ग्राहकों की छिपाई गई धनराशि का पर्दाफाश किया है. इसमें राजनीतिक व्यक्तियों से लेकर व्यापारिक व्यक्ति भी शामिल हैं.
चुनाव आयोग को पेश संपत्ति घोषणा में उन खातों का जिक्र नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, कई राजनीतिक व्यक्तियों ने ऐसे वक्त में अपने खाते खोले, जब वे सार्वजनिक कार्यालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. पाकिस्तान के चुनाव आयोग को पेश अपनी संपत्ति की घोषणा में कई राजनीतिक व्यक्तियों ने इन खातों के बारे में कभी खुलासा नहीं किया, जो उन्होंने उस वक्त खोले थे जब वे सार्वजनिक पद पर थे. डेटा में वर्तमान में पाकिस्तान में जांच के तहत कुछ मामलों के विवरण भी शामिल हैं, जहां जांचकर्ताओं को जांच के तहत संपत्ति के बारे में गलत जानकारी दी गई थी.
200 ग्राहकों की राशि 19 अरब से ज्यादा
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानियों द्वारा उपयोग में लाए गए खातों में औसत अधिकतम शेष राशि 4.42 मिलियन स्विस फ्रैंक (841 मिलियन रुपये) थी, जो लीक हुए डेटा के समग्र औसत की तुलना में 7.5 मिलियन स्विस फ्रैंक (1.42 अरब रुपये) थी. डेटा में पाए गए लगभग 200 ग्राहकों की राशि 100 मिलियन स्विस फ्रैंक (19 अरब रुपये) से अधिक है और एक दर्जन से ज्यादा खातों में अरबों की राशि बताई गई है.
आईएसआई के पूर्व प्रमुख का भी लीक में आया नाम
पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी के पूर्व प्रमुख और अफगानिस्तान पर सोवियत संघ के आक्रमण के खिलाफ मुजाहिदीन नेटवर्क के संस्थापक रहे जनरल अख्तर अबुर रहमान खान का नाम भी स्विस बैंक गोपनीय डाटा लीक मामले में सामने आया है. खान, पूर्व तानाशाह जनरल जिया उल हक के करीबी रह चुके थे. दोनों की 1988 में एक विमान दुर्घटना में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी. न्यूयार्क टाइम्स की खबर में कहा गया है, ‘‘पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी (आईएसआई) का प्रमुख रहने के दौरान खान ने अमेरिका एवं अन्य देशों से मिली अरबों डॉलर नकदी और अन्य सहायता अफगानिस्तान में मुजाहिदीन को उपलब्ध कराने में मदद की ताकि सोवियत संघ (अब विघटित हो चुके) के खिलाफ लड़ाई में उनकी मदद की जा सके.’’
Zee Salaam Live Tv