अफगानिस्तान पर पूरी तरह कब्जा करने और वहां की सरकार को अपदस्थ करने के बाद तालिबान ने अपने शासन की रूपरेखा बताई है. साथ ही भारत को लेकर भी अपनी राय जाहिर की है.
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नई दिल्लीः अफगानिस्तान पर मुकम्मल तौर पर अपना कब्जा जमाने के बाद तालिबान ने अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर बयान दिया है. तालिबान ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में दुनिया के सभी देशों के साथ सहयोग करना हमारी नीति है. अब एक नया अध्याय खुला है, वह है देश का निर्माण करना और लोगों का आर्थिक विकास करना. इसके साथ ही तालिबान ने भारत को लेकर भी बयान दिया है. संगठन के तर्जुमान सुहैल शाहीन ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि भारत अपना रुख बदलेगा और उनका साथ देगा. प्रवक्ता ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए तालिबान के रोडमैप सहित कई अन्य मुद्दों को लेकर एक चैनल से बातचीत की है. उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि भारत अपनी नीतियों में बदलाव करेगा क्योंकि इससे पहले वो थोपी गई एक कठपुतली सरकार की हिमायत कर रहे थे. सरकार को किस तरह चलाया जाएगा, इसपर तालिबानी प्रवक्ता ने कहा, ‘पहले हमारे पास सरकार चलाने का अनुभव नहीं था लेकिन 20-25 साल के बाद हमें सरकार चलाने और दूसरे देशों के साथ संबंध स्थापित करने का अनुभव है. हम अपने देश के पुनर्निर्माण और राष्ट्रीय एकता पर भी ध्यान देंगे.’
‘‘खुली और समावेशी” इस्लामी सरकार चाहता है तालिबान
तालिबान के प्रवक्ता और वार्ताकार ने कहा कि चरमपंथी संगठन अफगानिस्तान में ‘‘खुली, समावेशी इस्लामी सरकार” बनाने के मकसद से वार्ता कर रहा है. सुहैल शाहीन ने तालिबान के कुछ ही दिनों में देश के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर लेने और राजधानी काबुल में घुस जाने के बाद यह बात कही है जहां अमेरिका अपने राजनयिकों और अन्य असैन्य नागरिकों को वापस बुलाने की जद्दोजहद में जुटा हुआ है. इससे पहले, तालिबान के एक अधिकारी ने कहा था कि संगठन राष्ट्रपति भवन से एक नयी सरकार की घोषणा करेगा लेकिन वह योजना फिलहाल टलती दिख रही है.
दूतावासों और राजनयिकों को सुरक्षा देने का आश्वासन
भारत सहित कई देशों ने अपने राजनयिकों और नागरिकों को अफगानिस्तान से निकालने की प्रक्रिया में तेजी लाई है. हालांकि शाहीन ने कहा कि तालिबान सभी विदेशी दूतावासों को सुरक्षा प्रदान करेगा. उन्होंने कहा, ‘अभी स्थिति ये है कि हम सभी दूतावासों और राजनयिकों को सुरक्षा प्रदान करेंगे. दूसरे देशों में हमारे दूतावास को लेकर कोई भी फैसला सरकार बनने के बाद तय किया जाएगा.’
सरकार बताए, अफगानिस्तान को लेकर उनकी क्या रणनीति हैः कांग्रेस
इधर, कांग्रेस ने अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद पैदा हुए हालात पर फिक्र जाहिर करते हुए सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर को ‘रहस्यमयी चुप्पी’ तोड़कर मुल्क को यह बताना चाहिए कि इस पड़ोसी देश को लेकर उनकी आगे की क्या रणनीति है और वहां से भारतीय राजनयिकों और नागरिकों की सुरक्षित वापसी की क्या योजना है. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस नरेंद्र मोदी सरकार से एक परिपक्व रणनीतिक एवं कूटनीतिक प्रतिक्रिया की उम्मीद करती है.
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