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नई दिल्ली: पाकिस्तान में आर्मी की बग़ावत और तख़्ता पलट की ख़बरे तो कई बार सुनी गयीं. ये पाकिस्तान की जम्हूरियत की बदनसीबी ही कही जा सकती है कि 73 सालों की तारीख़ में आधे तक फ़ौज की तानाशाही ने जमहूरियत का गला घोंटा है. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि पहली बार आर्मी का ही तख़्ता पलट जाएगा. ये भी पहली बार है कि सियासत के महाज़ पर बरसरे इक़्तेदार पार्टी, अपोज़िशन और फ़ौज के साथ साथ पुलिस भी उतर आई.
पहली बार पुलिस ने की बग़ावत
पाकिस्तान की तारीख़ में ये भी पहली बार है , जब ऐसा इल्ज़ाम लगा है कि पुलिस के एक बड़े अफ़सर को ही 'अग़वा' कर लिया गया और उनसे ज़बरदस्ती नवाज़ शरीफ़ के दामाद को गिरफ़्तार करवाने के लिए दस्तख़त करवाए गए. पुलिस ने इस वाक़्ये को अपनी इज़्ज़त का मामला बना लिया और फिर अफ़सर और उनके एक दर्जन से ज़्यादा दूसरे अफ़सरों ने दो महीने के लिए छुट्टी पर जाने की दरख़्वास्त डाल दी. पुलिस के इस बाग़ी अंदाज़ को देखते हुए आर्मी मैदान में कूदी और आर्मी चीफ़ ने मामले की फ़ौरन जाँच कराने के अहकामात जारी किए. इस पूरे मामले में किसी को किसी पर एतबार नज़र नहीं आ रहा है. न अपोज़िशन को सरकार पर, न पुलिस को फ़ौज पर. इस ग़ैर मुस्तहकम हालात से पाकिस्तान में ख़ाना जंगी के हालात पैदा हो गए हैं.
इमरान के ख़िलाफ़ अपोज़िशन मुत्तहिद
इसके अलावा पाकिस्तान में अपोज़िशन ने महँगाई, बिजली नहीं रहने और दूसरे माअशी मुद्दों को लेकर इमरान ख़ान सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. अपोज़िशन जमातों ने मिलकर पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) नाम का एक इत्तेहाद भी बनाया है. जिसमें चार बड़ी पार्टियों पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फ़ज़लुर) और पख़्तूनख़्वाह मिल्ली अवामी पार्टी के अलावा छोटी पार्टियां भी शामिल हैं. इस इत्तेहाद की जानिब से दो रैलिया हो चुकी हैं. 16 अक्तूबर को पंजाब के गुजरांवाला में और 18 अक्तूबर को सिंध की राजधानी कराची में. और दूसरी रैली के अगले ही दिन एक दूसरा मामला शुरू हो गया.
पाकिस्तानी रेंजर्स पर गिरफ़्तारी का इल्ज़ाम
जिन्ना की मज़ार की बेहुरमती मामले में जिस तरह से नवाज़ शरीफ़ के दामाद और मरियम नवाज़ के शौहर कैप्टन (रि.) मोहम्मद सफ़दर को गिरफ़्तार किया गया. इस गिरफ़्तारी को अपोज़िशन जमातों ने बदले की सियासत क़रार दिया और दावा किया कि गिरफ़्तारी भले पुलिस ने की, लेकिन इसमें पाकिस्तानी पैरा मिलिट्री फ़ोर्स रेंजर्स का हाथ है. अपोज़िशन जमातें इस मुद्दे पर पूरी तरह मुत्तहिद नज़र आयीं. पीपीपी के लीडर बिलावल भुट्टो ने मरियम नवाज़ से बात की और उनसे इज़हारे हमर्दी करते हुए साथ खड़े रहने का भरोसा जताया.
फ़ौज के अंदर भी बग़ावत की आहट
इस पूरे मामले में इमरान ख़ान ख़ामोश रहे, लेकिन अपोज़िशन की रैलियों और मुज़ाहिरों पर उनके बयानात लगातार आ रहे हैं. आईएसआईए अपनी पिठ्ठू सरकार के साथ मज़बूती से खड़ी नज़र आ रही है. ऐसे में एक मुल्क कई चेहरे लगाए खड़ा है, सरकार, अपोज़िशन, आईएसआई, आर्मी और अब पुलिस. पहली बार ये भी सामने आ रहा है कि बाजवा को मिले 3 साल के एक्सटेंशन से फ़ौज के कई जनरल और सीनियर अफ़सरान में बग़ावत की आग लग रही है. किसी भी मुल्क में फ़ौज उसका ताज होती है. मुल्क के अवाम के दिलों में अपनी फ़ौज और उसके सरबराह का बड़ा एहतेराम और इज़्ज़त होती है. लेकिन बदलते हालात में अब पाकिस्तान में फौज हीरो नहीं विलेन बन गयी है. लोगों मे सख़्त नाराज़गी है और पूरा मुल्क ख़ाना जंगी की तरफ़ बढ़ रहा है. कशीदगी मज़ीद बढ़ी तो न तो फ़ौज क़ाबू कर पाएगी, न सरकार, न इंटेलिजेंस और न ही वहां की मज़हबी क़यादतें.
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