Trump Netanyahu Meeting on Epic Fury: इजरायल और अमेरिकी ने बीते 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर पूरी दुनिया में अनिश्चितता पैदा कर दी है. इसका खामिया अब आम लोगों तक को भुगतना पड़ रहा है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस की गुप्त बैठक में ट्रंप और नेतन्याहू ने ईरान पर हमले की योजना बनाई. खुफिया एजेंसियों की शंका के बावजूद ऑपरेशन "एपिक फ्यूरी" को मंजूरी दी गई, जिसके बाद ईरान पर एयरस्ट्राइक हुई और हालात बिगड़ गए.
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US Israel Attack Plan on Iran: मिडिल ईस्ट में जारी जंग फिलहाल कुछ हदतक थमती नजर आ रही है. हालांकि, सीज़फ़ायर की इस डील में नेतन्याहू रोड़ा बने हुए हैं, और इस जंग की बुनियाद, प्लानिंग और लागू करना के पीछे जो सबसे अहम किरदार है, वो भी नेतन्याहू ही हैं. न्यूयार्क टाइम्स के में छपी एक खबर ने डिप्लोमेसी के बंद कमरों में खलबली मचा दी है. 11 फरवरी को सुबह 11 बजे से ठीक पहले, इज़राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर एक काली SUV व्हाइट हाउस पहुंची. वह मीडिया की नजरों से बचते हुए ओवल ऑफिस के पास एक कॉन्फ्रेंस रूम में घुस गए. अमेरिका और इज़राइली टॉप ऑफ़िशियल्स वहां पहले से जमा थे. बाद में वो एक अंडरग्राउंड सिचुएशन रूम में चले गए. व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के पीएम के लिए किया जाना बहुत गैर मामूली था.
सिचुएशन रूम में दीवार पर लगी एक बड़ी स्क्रीन की तरफ़ मुंह करके डोनाल्ड ट्रंप हेड सीट यानी चेयर के बजाय टेबल के किनारे बैठे थे. नेतन्याहू सीधे ट्रंप के सामने बैठे थे. स्क्रीन पर मोसाद डायरेक्टर डेविड बार्निया और इज़राइली आर्मी ऑफ़िसर्स दिख रहे थे. स्क्रीन पर दिखने वाले लोग नेतन्याहू के पीछे दिखाई दे रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे किसी जंग की सूरते हाल में लीडर अपने सलाहकार से घिरा हो.
मीटिंग में व्हाइट हाउस की चीफ़ ऑफ आर्मी स्टाफ़ सूज़ी वाइल्स, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर मार्को रुबियो, डिफ़ेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ, JCS चेयरमैन डैन केन, CIA डायरेक्टर जॉन रैडक्लिफ़, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और मिडिल ईस्ट के एम्बैसडर स्टीव विटकॉफ शामिल थे. जेडी वेंस उस वक्त अज़रबैजान दौरे पर होने के सबब इस मीटिंग में शामिल नहीं थे. कैबिनेट के दूसरे सीनियर लीडर्स को इस मीटिंग के बारे में पता ही नहीं था.
इज़रायली प्रधानमंत्री ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ ईरान पर हमले के मंसूबों पर एक घंटे की ब्रीफिंग की. प्रेसिडेंट ट्रंप ने जवाब दिया "Sounds Good." यह एक अच्छा आइडिया है. यही वह पल था जब प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान पर एयरस्ट्राइक करने का फ़ैसला किया. मीटिंग के दौरान, नेतन्याहू ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयत उल्ला अली खामेनेई की वजह से पैदा हुए वजूद के खतरे पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि ईरान की रिजीम (सत्ता) को बदलने का ये सही वक़्त है, और भरोसा जताया कि अमेरिका और इज़राइल मिलकर इस्लामिक हुकूमत को खत्म कर सकते हैं. उन्होंने ईरानी रिजीम को बदलने के लिए नए वारिसों के नाम भी बताए. जिनमें अमेरिका में रह रहे ईरानी शाह के बेटे रज़ा पहलवी का नाम भी शामिल था.
इज़राइली अफसरों ने दावा किया कि ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम कुछ हफ़्तों में खत्म किया जा सकता है. ईरान इतना कमज़ोर हो गया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट को रोक नहीं सकता और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों और हितों पर ईरान के हमले की संभावना बहुत कम है. मोसाद ने ये भी दलील दी कि ईरान में नए सिरे से अंदरूनी बगावत को भड़काया जाएगा. बाग़ियों के लीडर से मिल कर सरकार गिराने का माहौल बनाया जाएगा. कुर्द लड़ाकों को लेकर नॉर्थ वेस्ट ईरान में एक मोर्चा बना सकते हैं. जिससे ईरानी फौज अंदूरुनी मसलों में उलझ जाएगी और सरकार गिरने की रफ़्तार तेज होगी.
मीटिंग में जब ईरान पर हमला करने के संभावित खतरे के बारे में सवाल उठा तो नेतन्याहू ने कहा कोई एक्शन न लेने का रिस्क, एक्शन लेने के रिस्क से ज़्यादा है. उन्होंने दावा किया कि अभी ईरान पर हमला न करने से उसके बैलिस्टिक मिसाइल और न्यूक्लियर प्रोग्राम और तेज हो जाएंगे. प्रेसिडेंट ट्रंप ने नेतन्याहू के इस जवाब पर पॉजिटिव रिस्पांस दिया. रिपोर्टस के मुताबिक वहां मौजूद व्हाइट हाउस के स्टाफ़ को लगा कि ट्रंप ने हमला करने का मन बना लिया है. पिछले साल जून में ईरान के साथ 12 दिन की लड़ाई के बाद प्रेसिडेंट ट्रंप पहले ही इजराइली मिलिट्री और इंटेलिजेंस एजेंसियों से बहुत इम्प्रेस हो चुके थे.
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मीटिंग के बाद, अमेरिकी इंटेलिजेंस अफसरों ने रात भर नेतन्याहू के दावों को आंकलन किया. प्रेसिडेंट ट्रंप के मीटिंग में शामिल होने से पहले उन्होंने अफ़सरों को अपना आंकलन रिपोर्ट पेश किया. उन्होंने यह नतीजा निकाला कि खामेनेई के खिलाफ सर कलम करने और ईरान की जवाबी कार्रवाई को बेअसर करने की काबिलियत अमेरिकी इंटेलिजेंस और मिलिट्री पावर से मुमकिन थी, लेकिन सेक्युलर लीडर्स की लीडरशिप में अंदरूनी बगावत या सरकार बदलने का संभावना नामुमकिन थी.
प्रेसिडेंट ट्रंप बाद में मीटिंग में शामिल हुए. CIA डायरेक्टर जॉन रैडक्लिफ ने नेतन्याहू के ईरान में सरकार बदलने के सिनेरियो को मज़ाकिया बताया. मार्को रुबियो ने कहा यह बकवास है. जॉन रैडक्लिफ़ ने कहा कि किसी भी लड़ाई में सरकार बदलने को कभी भी हासिल किया जा सकने वाला गोल नहीं मानना चाहिए. अज़रबैजान से लौटे वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस और दूसरे स्टाफ़ ने सरकार बदलने की संभावना पर गहरा शक जताया.
प्रेसिडेंट ट्रंप ने JCS चेयरमैन डैन केन की तरफ़ मुड़कर पूछा, आप क्या सोचते हैं? केन ने जवाब दिया कि इज़राइल आमतौर पर बढ़ा-चढ़ाकर बातें करता है. वो इसलिए ज़ोर दे रहे हैं क्योंकि उन्हें हमारी ज़रूरत है फिर प्रेसिडेंट ट्रंप ने कहा कि सरकार बदलना उनकी प्रॉब्लम होगी. New York Times के मुताबिक, यह साफ़ नहीं था कि वो इज़राइल की बात कर रहे थे या ईरानी लोगों की. ट्रंप ने प्लान के अन रियलिस्टिक हिस्सों के बजाय ईरान की लीडरशिप को खत्म करने और उसकी मिलिट्री को कमज़ोर करने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखाई.
कुछ दिनों बाद JCS चेयरमैन डैन केन ने मिलिट्री ऑपरेशन के खतरों की वॉर्निंग दी. उन्होंने आशंका जताई की कि ईरान पर हमला करने से अमेरिका के हथियारों का स्टॉक तेजी से खत्म हो जाएगा, और उन्हें जल्दी से फिर से भरने का कोई तरीका नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करना बहुत मुश्किल होगा और ईरान शायद इसे रोक देगा. ट्रंप ने इन दलीलों को यह तर्क देते हुए खारिज कर दिया कि ऐसे हालात पैदा होने से पहले ही ईरानी रिजीम सरेंडर कर देगी.
कैबिनेट में ईरान पर हमले के सबसे बड़े सपोर्टर डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ थे, जबकि मार्को रूबियो ने जंग के बजाय दबाव वाले ऑपरेशन जारी रखने को तरजीह दी, लेकिन उन्होंने ट्रंप को रोकने की कोशिश नहीं की. चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ वाइल्स ने मिलिट्री मामलों पर अपनी राय ज़ोरदार ढंग से ज़ाहिर नहीं की. इसके बजाय, उन्होंने ट्रंप को JCS चेयरमैन डैन केन, CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ़ और सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रूबियो जैसे लीडर्स की बात को तरजीह देने के लिए कहा. वाइल्स को मिड टर्म इलेक्शन से पहले तेल की कीमतों में उछाल की फ़िक्र थी, लेकिन आखिरकार वो इस जंग के लिए तैयार हो गईं.
ट्रंप के करीबी लोगों में सबसे मज़बूत जंग के विरोधी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वैंस थे. वो सत्ता परिवर्तन के लिए जंग को "आपदा" कह रहे थे, लेकिन उनका मानना था कि ट्रंप किसी न किसी तौर से ईरान पर हमला जरूर करेंगे. उन्होंने हमले के दायरे को सीमित करने की कोशिश की. जब ट्रंप का बड़े पैमाने पर हमला करने का फ़ैसला पक्का हो गया, तो वैंस ने जंग को जल्दी खत्म करने के लिए जबरदस्त मिलिट्री पावर तैनात करने की वकालत की. वैंस ने ट्रंप को वॉर्निंग दी कि ईरान के साथ जंग से मिडिल ईस्ट में अफरा-तफरी मच जाएगी और भारी जान-माल का नुकसान होगा.
अमेरिका और इज़राइल ने फरवरी के आख़िर में एक नई खुफिया जानकारी पर चर्चा की. जिससे ईरान पर हमले की डेड लाइन में काफ़ी तेज़ी आ गई. इस खुफिया जानकारी से पता चला कि खामेनेई दिन में जमीन पर टॉप ऑफ़िशियल्स से मिलेंगे, जो कि हमला करने का एक सही मौक़ा था और शायद दोबारा न मिलता. ट्रंप ने असल में हफ़्तों पहले ही ईरान पर हमला करने का फैसला कर लिया था लेकिन उन्होंने कोई तारीख तय नहीं की थी.
इसी दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप से एक्शन की अपील की. उसी हफ़्ते कुशनर और विटकॉफ़ जेनेवा में ईरान के साथ बातचीत कर रहे थे, और ईरान को मुफ़्त न्यूक्लियर फ़्यूल देने का प्रपोजल रखा, ताकि यह परखा जा सके कि उसकी एनरिचमेंट डोमेस्टिक जरूरतों के लिए है या न्यूक्लियर बम बनाने के लिए. ईरान ने इस प्रपोजल को ठुकरा दिया. कुशनर और विटकॉफ़ ने ट्रंप को बताया कि किसी समझौते तक पहुंचने में महीनों लग सकते हैं.
फरवरी को शाम 5 बजे सिचुएशन रूम में एक आखिरी बैठक हुई. बैठक में शामिल सभी लोगों का रुख़ साफ़ था, क्योंकि पिछली बैठकों में पहले ही चर्चाएं हो चुकी थीं और हर कोई एक-दूसरे के नजरिए से वाक़िफ था, जैसे ही पीट हेगसेथ और डैन केन ने ईरान पर हमले के बारे में बताया. प्रेसिडेंट ट्रंप ने सभी से अपनी-अपनी राय देने को कहा. जेडी वैंस ने कहा आप जानते हैं आप क्या कह रहे हैं? लेकिन साथ ही उन्होंने जोड़ दिया कि अगर आप फैसला करते हैं तो मैं इसकी हिमायत करता हूं. सूज़ी वाइल्स ने कहा कि अगर अमेरिका की सिक्योरिटी के लिए जरूरी समझा गया तो वह आगे बढ़ेंगी.
पीट हेगसेथ ने तर्क दिया कि अगर ईरान से निपटना ही है, तो अभी निपटना बेहतर है. उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन को एक तय डेड लाइन के अंदर, एक तय फ़ौजी तादाद के साथ अंजाम दिया जा सकता है. डैन केन ने हथियारों की कमी के जोखिम के बारे में बताया, लेकिन कहा कि अगर ट्रंप ऑर्डर देंगे तो फ़ौज उस हुक्म पर अमल करेगी.
मार्को रूबियो ने कहा कि अगर टारगेट रिजीम चेंज या बग़ावत है तो ऐसा नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को तबाह करना मुमकिन है. फिर ट्रंप बोले मुझे लगता है कि हमें ऐसा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार रखने या इज़राइल या इस रीजन पर मिसाइलें दागने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए, और फिर एक दिन बाद ट्रंप ने ये ऑर्डर जारी किया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को मंज़ूरी दी जाती है. इसके बाद 28 फ़रवरी की सुबह होने से पहले ईरान में जो हुआ वो दुनिया ने देखा और आज तक इसका खामियाजा पूरी दुनिया भुगत रही है.
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