Shayari: हम बदलते हैं रुख़ हवाओं का... क्या आपने पढ़ें क़ाबिल अजमेरी के शानदार शेर

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

वो कब आएँ ख़ुदा जाने सितारों तुम तो सो जाओ हैरतों के सिलसिले सोज़-ए-निहाँ तक आ गए

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

हम ने उस के लब ओ रुख़्सार को छू कर देखा हौसले आग को गुलज़ार बना देते हैं

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

हम बदलते हैं रुख़ हवाओं का आए दुनिया हमारे साथ चले

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

तुम न मानों मगर हक़ीक़त है इश्क़ इंसान की ज़रूरत है

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

ज़माना दोस्त है किस किस को याद रखोगे ख़ुदा करे कि तुम्हें मुझ से दुश्मनी हो जाए

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

कुछ देर किसी ज़ुल्फ़ के साए में ठहर जाएँ 'क़ाबिल' ग़म-ए-दौराँ की अभी धूप कड़ी है

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

अब ये आलम है कि ग़म की भी ख़बर होती नहीं अश्क बह जाते हैं लेकिन आँख तर होती नहीं

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

रास्ता है कि कटता जाता है फ़ासला है कि कम नहीं होता

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

वक़्त करता है परवरिश बरसों हादिसा एक दम नहीं होता

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

रंग-ए-महफ़िल चाहता है इक मुकम्मल इंक़लाब चंद शम्ओं के भड़कने से सहर होती नहीं

Published by: Zee Team | Dec 02, 2024

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