भगवान कृष्ण के नाम से कलियुग में किसकी होती है पूजा?

Jun 17, 2024

खाटू श्याम असल में भीम के पोते और घटोत्कच के बेटे ‘बर्बरीक’ हैं.

बर्बरीक वीर और महान योद्धा थे. इन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न कर उनसे तीन अभेद्य बाण प्राप्त किए थे.

दरअसल, महाभारत के युद्ध में बर्बरीक ने अपनी माता अहिलावती के समक्ष युद्ध में जाने की इच्छा प्रकट करते हुए युद्ध में किसका साथ देने का प्रश्न पूछा.

इस प्रश्न पर अहिलावती ने बर्बरीक से कहा कि ‘जो हार रहा हो, तुम उसी का सहारा बनो.’

भगवान श्रीकृष्ण जानते थे अगर कौरवों को हारता देखकर बर्बरीक कौरवों का साथ देने लगा तो पांडवों का हार निश्चित हो जाएगी.

पांडवों के जीत के लिए श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण के रूप में बर्बरीक से उनका सर दान में मांग लिया.

ब्राम्हण के इस बात को सुन बर्बरीक ने अपनी तलवार निकालकर श्रीकृष्ण के चरणों में अपना सिर अर्पण कर दिया.

महाभारत के युद्ध के बाद भगवान श्री कृष्ण द्वारा बर्बरीक को कलियुग में स्वयं के नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था.

बाबा श्याम खाटू धाम के श्याम कुंड में प्रगट हुए तब से ही बर्बरीक को खाटू श्याम के रूप में पूजा जाता है.

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