Nawada Seat Profile: नवादा में भूमिहार बनाम पिछड़ा की फाइट, देखिए क्या कहते हैं जातीय समीकरण?
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Nawada Seat Profile: नवादा में भूमिहार बनाम पिछड़ा की फाइट, देखिए क्या कहते हैं जातीय समीकरण?

Nawada Lok Sabha Seat Profile: इस सीट की जनता को विकास के मुद्दों से जातिवाद ज्यादा पसंद आता है. यहां जातिवाद इतना हावी है कि विकास से जुड़े तमाम मुद्दे चुनाव के समय यहां गौन हो जाते हैं. एनडीए की ओर से इस बार बीजेपी के राज्यसभा सांसद विवेक ठाकुर को मैदान में हैं. तो वहीं महागठबंधन की ओर से राजद के श्रवण कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया गया है. 

नवादा लोकसभा सीट

Nawada Lok Sabha Seat Profile: बिहार में लोकसभा चुनाव का रण सज चुका है. पहले चरण के लिए एनडीए और इंडिया ब्लॉक दोनों गठबंधनों की ओर से अपने-अपने महारथियों को उतार दिया गया है. पहले चरण में बिहार की नवादा सीट पर भी वोट पड़ने हैं. बरबीघा, रजौली, हिसुआ, नवादा, गोबिंदपुर, वारिसलीगंज इन 6 विधानसभा सीटों को मिलाकर बनी नवादा लोकसभा सीट का चुनावी गणित भी बिल्कुल अलग है. इस सीट की जनता को विकास के मुद्दों से जातिवाद ज्यादा पसंद आता है. यहां जातिवाद इतना हावी है कि विकास से जुड़े तमाम मुद्दे चुनाव के समय यहां गौन हो जाते हैं. जातीय फैक्टर ही चुनाव जीतने का सबसे बड़ा हथियार बनता रहा है. पहले यह सीट सामान्य सीट ना होकर आरक्षित सीट थी तब भी यहां जातीय समीकरण ही काम आता था और 2009 के परिसीमन में सीट सामान्य हुई तो भी यहां यही फैक्टर हावी रहा.  

एनडीए की ओर से इस बार बीजेपी के राज्यसभा सांसद विवेक ठाकुर को मैदान में हैं. तो वहीं महागठबंधन की ओर से राजद के श्रवण कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया गया है. एनडीए प्रत्याशी विवेक ठाकुर भूमिहार समाज से आते हैं. राजनीति उनको विरासत में मिली है. उनके पिता डॉ. सीपी ठाकुर बिहार बीजेपी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं. विवेक ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और अब तक के अपने करीब 28 साल के राजनीतिक जीवन में वह बीजेपी में विभिन्‍न पदों पर रह चुके हैं. नामांकन पत्र भरने के दौरान उन्होंने जो शपथ पत्र दायर किया है, उसके अनुसार उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड नई दिल्ली से मास्टर डिग्री हासिल की है. वे कुल 2,85,43,552.36 रुपये की संपत्ति के मालिक हैं. उन्होंने कुल 70,94,014.00 रुपये का ऋण ले रखा है, जबकि किसी भी प्रकार का सरकारी बकाया नहीं है. इनके खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है.

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जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार श्रवण कुशवाहा पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते हैं. श्रवण महज 10वीं पास हैं. उनके पास 4 करोड़ की संपत्ति है और उनपर 6 आपराधिक मामले दर्ज हैं. श्रवण दो बार एमएलसी और तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं. यह पहला मौका है जब संसदीय चुनाव लड़ रहे हैं. श्रवण और उनकी पत्नी ममता देवी के पास चार करोड़ 55 लाख 38 हजार 613 रुपए की चल और अचल संपति है. दो करोड़ 42 लाख 68 हजार 613 रुपए श्रवण जबकि दो करोड़ 12 लाख 70 हजार की संपति उनकी पत्नी के पास है. श्रवण के पास 1 करोड़ 92 लाख और पत्नी के पास 52 लाख रुपए की देनदारी भी है. श्रवण के पास नौ एकड़ जमीन, जबकि उनकी पत्नी के पास चार एकड़ जमीन है. विरासत में एक एकड़ जमीन थी. कादिरगंज में श्रवण दंपति के नाम पर मकान है. श्रवण के पास पांच लाख और पत्नी के पास ढ़ाई लाख रुपए नगद है. श्रवण के पास 300 ग्राम सोना जबकि उनकी पत्नी के पास है.

इस सीट के जातीय समीकरण

2011 के जनगणना के अनुसार, नवादा जिले की 22,19,146 आबादी है. यहां पर पुरुषों की आबादी 11,44,668 है. वहीं महिलाओं की आबादी 10,74,478 है. जिले की शिक्षा दर 59.76 प्रतिशत है. इस सीट के जातीय समीकरण की बात करें तो यहां यादव और भूमिहार वोटर्स सबसे ज्यादा हैं. इसके अलावा एससी-एसटी समुदाय के वोटर्स भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं. यहां ब्राह्मण और मुस्लिम वोटर्स हैं.

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महिलाएं दिखा रहीं दम-खम

पिछले कुछ चुनावों से महिलाओं की भागीदारी अव्वल रही है. पुरुषों की अपेक्षा उनका मतदान प्रतिशत कहीं अधिक है. लोकसभा चुनाव 2019 में नवादा जिले के 48.76 फीसदी पुरुषों ने मतदान किया, तो 49.76 फीसदी महिला मतदाताओं ने अपना वोट डाला. पुरूषों से महिलाएं दो कदम आगे ही रही. 2015 के विधानसभा चुनाव में भी पुरुषों की अपेक्षा 3.36 फीसदी अधिक महिला वोटरों ने मताधिकार का प्रयोग किया था. गांव-नगर की सरकार हो या संसद की. महिलाएं प्रत्याशियों के जीत-हार में अपना दम-खम दिखा रही है.

रिपोर्ट- प्रिंस राज सूरज

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