बीकानेर: डाटा हैकिंग रोकने के लिए छात्र ने बनाई अनोखी डिवाइस, ऐसे करती है काम

बीकानेर के गौरव ने लाइट की तरंगो का इस्तेमाल करते हुए डाटा ट्रांसफर की तकनीक का इजात किया है. 

बीकानेर: डाटा हैकिंग रोकने के लिए छात्र ने बनाई अनोखी डिवाइस, ऐसे करती है काम
गौरव पिछले एक साल से इस डिवाइस को बनाने का काम कर रहे थे.

बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर के एक छात्र ने क्षेत्र में वाईफाई और ब्लूटूथ से ट्रांसफर किए जाने वाले डाटा की हैकिंग को रोकने के लिए एक अनोखा सिस्टम तैयार किया है. यह एक लाइट कॉम्युनिकेशन सिस्टम है जिमसें लाइट के इस्तेमाल से डेटा हैकिंग को रोका जा सकता है. बीकानेर के पॉलिटेक्निक कॉलेज के स्टूडेंट गौरव मोदी ने इस सिस्टम को तैयार किया है. 

20 साल के इस छात्र ने हैकिंग को रोकने के लिए ही एक लाइटनिंग सिस्टम तैयार किया हैं. जो दफ्तर के सुरक्षा सिस्टम में सेंधमारी से बचाव कर सकता है. वो भी लाइट के जरिए. इस सिस्टम को गौरव ने एलसीएस यानी लाइट कॉम्युनिकेशन सिस्टम नाम दिया है. जिसमें लाइट के इस्तेमाल से डेटा को ट्रांसफर किया जाता हैं. दरअसल, विश्वभर के कई ऑफिसों में वाईफाई और ब्लूटुथ के जरिए डाटा ट्रांसफर किया जाता है और इस डाटा को कई बार हैक कर लिया जाता है. 

सिस्टम में पासवर्ड होने के बाद भी हैकर्स इस डाटा को हैक कर लेते हैं और इस तरह की हैकिंग की खबरें भी कई बार सामने आती रही हैं. बीकानेर के गौरव ने लाइट की तरंगो का इस्तेमाल करते हुए डाटा ट्रांसफर की तकनीक का इजात किया है. हालांकि अभी तक गौरव ने इसे छोटे रूप में बनाया है और इसे और बड़े रूम में तैयार करने की इच्छा रखता है.

क्या है एलसीएस सिस्टम
गौरव मोदी द्वारा इनोवेट किया गया यह ऐसा मॉडल हैं जिसमें लाइट के द्वारा किसी डिवाइस को चलाया जा सकता है. इसमें एक सोलर प्लेट लगाई गई है इसकी खासियत यह है कि इसे कोई भी हैक नहीं कर सकता क्योंकि हम जानते हैं काफी ऐसी वायरलेस डिवाइस है जोकि हैक की जा सकती हैं जो ब्लूटूथ या वाईफाई से चलती हैं. लेकिन एक लाइट को कभी हैक नहीं किया जा सकता जब रोशनी की वेव्स इस सोलर प्लेट पर पड़ती है ये ऑटोमेटिकली ऑन हो जाता है और यह लाइट की रूप में कम्युनिकेट करती है. जितनी स्ट्रांग लाइट होगी उतना ही स्ट्रांग इनका कम्युनिकेशन होगा.

गौरव ने बताया कि पिछले एक साल से वो इस सिस्टम पर काम कर रहे हैं और इस सिस्टम को देश को समर्पित करना चाहते हैं. इस सिस्टम को हर ऑफिस तक पहुंचाना चाहते हैं. गौरव का कहना है कि प्रारंभिक रूप से इसे बनाने में 1200 रुपय का खर्च आया. वहीं गौरव के इस इनोवेशन से उसके परिवार को भी गर्व हैं.