Good News: अब राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव लड़ सकेंगे कुष्ठ रोगी, सदन में पास हुआ विधेयक

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी का कहना है कि सरकार ने दिव्यांगता को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया है. जिसमें अब कुष्ठ रोगियों को भी वे सभी अधिकार मिलेंगे जो दिव्यांगों को दिए जाते थे. 

Good News: अब राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव लड़ सकेंगे कुष्ठ रोगी, सदन में पास हुआ विधेयक

जयपुर: राजस्थान में 24 साल बाद पंचायतीराज के अजीबोगरीब कानून को बदल दिया गया है. प्रदेश में अब कुष्ठ रोगी भी पंचायतीराज चुनाव लड़ सकते हैं .जी मीडिया की मुहिम के बाद राज्य सरकार पंचायतीराज के नियमों में संशोधन के लिए विधानसभा में विधेयक लेकर आई और उसे सदन में मंजूरी मिल गई. अब वोट देने के साथ साथ कुष्ठ रोगियों को चुनाव लड़ने का भी पूरा अधिकार होगा. इससे पहले कुष्ठ रोगियों को केवल मतदान देने का ही अधिकार था. कुष्ठ रोगियों के अधिकारों के हनन को देखते हुए जब जी मीडिया ने सरकार को इस बारे में जानकारी दी तो मंत्रियों ने भी माना की पंचायतीराज में कुष्ठ रोगियों के अधिकारों का हनन हो रहा है.

विधानसभा की कार्रवाई शुरू होने से पहले जी मीडिया ने पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड और अरूण चतुर्वेदी को इस बारे में अवगत करवाया था. दोनों ही मंत्रियों ने कहा कि जो व्यकि मतदान देने का अधिकार रखता है उसे चुनाव लड़ने का भी उतना ही अधिकार है. फिर सदन की कार्रवाई शुरू हुई तो पहले ही दिन विधानसभा में इस बिल को रखा गया और अब सदन से इस बिल को मंजूरी मिलने के बाद कुष्ठरोगियों के चेहरे देखते ही खिल उठे. अब वे भी मजबूती के साथ कह रहे हैं कि हां अब हम भी चुनाव लड सकते है.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी का कहना है कि सरकार ने दिव्यांगता को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया है. जिसमें अब कुष्ठ रोगियों को भी वे सभी अधिकार मिलेंगे जो दिव्यांगों को दिए जाते थे. अब उन्हें दिव्यांगों की सभी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा क्योंकि अब उन्हें दिव्यांगता की श्रेणी में गिना जाता है. जहां तक बात है पंचायतीराज चुनावों की तो विधानसभा में बिल लाकर इसमें संशोधन कर दिया गया है. अब हर अधिकार कुष्ठ रोगियों को मिलेगा. मतदान के साथ साथ कुष्ठ रोगी अब चुनाव भी लड़ सकेगा. 

65 साल की नीलमणि ने बोलती है मुझे अवसर मिला तो मैं जरूर चुनाव लडूगी.उनका कहना है कि सरकार ने हमारे अधिकारों को लेकर बडा फैसला लिया है,अब अवसर मिला तो मैं भी चुनाव लड सकूगी। 

भारत के संविधान के मुताबिक जो व्यक्ति मतदान कर सकता है, उसे चुनाव लड़ने का भी पूरा अधिकार होता है. धारा 19 एफ यह कहता था कि पंचायत चुनाव में पंच या किसी अन्य सदस्य के तौर पर लड़ने के लिए क्या क्या योग्यताएं होनी चाहिए. इस धारा में उन बातों का भी उल्लेख किया गया है कि कौन से लोग चुनाव नहीं लड़ सकते. धारा 19 एफ के मुताबिक कोई स्त्री या पुरूष अगर कुष्ठ रोग से पीड़ित है या फिर किसी अन्य ऐसी गंभीर शारीरिक या मानसिक रोग से पीड़ित है, जिससे की उसके काम करने में परेशानियां हो सकती है, ऐसी स्थिति में वो चुनाव नहीं लड़ सकते. लेकिन अब विधानसभा में इस बिल को पास कर दिया गया है और अब कुष्ठ रोगी भी चुनाव लड़ सकते हैं. 

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