कॉलेज क्लर्क के 32 सालों का PF हुआ गायब, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साधी चुप्पी

महेंद्र सिंह के मुताबिक कॉलेज प्रशासन भी इस मुद्दे पर उसका साथ देने को तैयार नहीं है.

कॉलेज क्लर्क के 32 सालों का PF हुआ गायब, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साधी चुप्पी
आज तक उसको 32 सालों के PF के पैसों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.

जोधपुर/अरुण हर्ष: सालों से घोटालों को लेकर चर्चा में रहने वाले संभाग स्तरीय जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में कई तरह के घोटाले सामने आते रहते हैं. चाहे शिक्षक भर्ती घोटाला हो या फिर लाइब्रेरी में किताबों का घोटाला हो सभी की प्रदेश में खूब चर्चा हुई. यहां तक कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के घोटाले की आवाज विधानसभा तक में भी गूंजी है. लेकिन इस बार मामला विश्वविद्यालय के साइंस फैकल्टी के क्लर्क से जुड़ा है.

खबर के अनुसार जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के साइंस फैकल्टी के क्लर्क महेंद्र सिंह के PF के जो पैसे काटे गए है वह गायब है. दरअसल महेंद्र सिंह विश्वविद्यालय में 32 सालों से कार्यरत हैं. इस साल के फरवरी महींनें में  जब महेंद्र सिंह की सैलरी आई तो उन्हें पता चला कि इस बार सैलरी PF के पैसे काटे बिना ही आ गई है. 

इसके लेकर जब महेंद्र सिंह ने कॉलेज में पता किया तो अधिकारियों ने महेंद्र को नया फार्म और नंबर लेने को कहा. ताकि PF के पैसे नए सिरे से काटे जा सकें. लेकिन महेंद्र ने इसके बाद पिछले 32 सालों के PF को पैसों के बारे में पूछा तो किसी अधिकारी नें इसका कोई जवाब नहीं दिया.

इस बात को लेकर महेंद्र ने यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार से लेकर एंटी करप्शन, मानव अधिकार आयोग, मुख्यमंत्री गृह से लेकर मंत्री प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखा है, लेकिन आज तक उसको 32 सालों के PF के पैसों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. महेंद्र सिंह के मुताबिक कॉलेज प्रशासन भी इस मुद्दे पर उसका साथ देने को तैयार नहीं है.

महेंद्र के कहा कि उसे एक लड़का और लड़की है. लेकिन पैसे नहीं होने के कारण से वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पा रहा है. यहां तक कि बेटी की शादी भी नहीं कर पा रहा है. यहां तक कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उसे लोन देने से भी मना कर दिया जा रहा है.  

जी मीडिया से बातचीत करते हुए महेंद्र ने बताया कि वह पहले सन 1984 से 86 तक अस्थाई रूप से उसकी नियुक्ति थी. जिसके बाद उसकी स्थाई नियुक्ति हाईकोर्ट के आदेशानुसार 25 अप्रैल 1987 को हुई थी. जिसको कारण विश्वविद्यालय प्रशासन उसे हमेशा परेशान करता रहता है. महेंद्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर यह आरोप लगाता कि विश्वविद्यालय प्रशासन हर बार किसी न किसी तरीके से उसे परेशान करता रहता है. सबसे बड़ी बात 32 साल की नौकरी में उसके जमा किए हुए पैसे किस खाते में चले गए कोई भी जवाब देने को तैयार नहीं है.

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