सपा कार्यकर्ता ध्यान से सुन लें, आज से मायावती का अपमान हमारा अपमान है: अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने कहा कि इस गठबंधन की शुरुआत तभी से हो गई थी जब बीजेपी के कुछ नेताओं ने बीएसपी प्रमुख मायावती पर अशोभनीय टिप्पणी की थी.

सपा कार्यकर्ता ध्यान से सुन लें, आज से मायावती का अपमान हमारा अपमान है: अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने सपा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे मायावती का सम्मान करें.

लखनऊ: समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन का ऐलान करते हुए पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि मौजूदा बीजेपी की सरकार ने भगवान राम और श्रीकृष्ण के जन्म स्थान वाले राज्य में सांप्रदायिकता का माहौल पैदा कर दिया है. अस्पतालों में जाति पूछकर इलाज किया जा रहा है. फिलहाल जातिवाद का आलम यह है कि बीजेपी वाले अब भगवान को भी जाति में बांट रहे हैं. उन्होंने कहा कि गरीब और दलित की बहू-बेटियों की इज्जत तार-तार हो रही है. 

सपा अध्यक्ष ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में सपा और बीएसपी मिलकर बीजेपी को हराएंगे. यह गठबंधन केवल चुनाव के लिए नहीं बल्कि बीजेपी के अत्याचार से लड़ने के लिए है. उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि बीजेपी वाले उन्हें पैसे की ताकत दिखाकर बरगलाने की कोशिश करेंगे, लेकिन उन्हें एकजुट रहना है. उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ता बीएसपी के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर बीजेपी को हराने के लिए काम करें.

अखिलेश यादव ने कहा कि इस गठबंधन की शुरुआत तभी से हो गई थी जब बीजेपी के कुछ नेताओं ने बीएसपी प्रमुख मायावती पर अशोभनीय टिप्पणी की थी. इसके बदले उन्हें दंडित करने के बजाय बीजेपी में ऊंचे पदों पर बैठा दिया. अखिलेश यादव ने सपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे आज से जान लें कि मायावती की प्रतिष्ठा को बचाना उनकी जिम्मेदारी है.  उन्होंने इस गठबंधन के लिए पूरी प्रेस कांफ्रेंस में मायावती का पांच बार शुक्रिया किया.

अखिलेश यादव ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी से अगर हमें दो कदम पीछे भी हटना पड़ेगा तो हम हटेंगे और बीजेपी को कड़ा जवाब देंगे. आदरणीय मायावती का सम्‍मान मेरा सम्‍मान है और अगर कोई भी मायावती जी का अपमान करता है तो वो मेरा अपमान होगा. हमें संयम और धैर्य से काम लेना है. बीजेपी के हर षड्यंत्र को बेकार करना है.

मायावती के भाषण की मुख्य बातें
इससे पहले प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की साझा प्रेस कांफ्रेंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की नींद उड़ाने वाली है. पहले 1993 में कांशीराम और मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन करके उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें में बड़ी सफलता मिली थी. मायावती ने स्पष्ट किया कि गेस्ट हाउस कांड से ऊपर उठते हुए हमने यह गठबंधन करने का फैसला लिया है. हमने देशहित में गेस्ट हाउस कांड को भुला दिया है. 25 साल बाद सपा-बसपा का गठबंधन बना है. यह गठबंधन बीजेपी जैसे घोर जातिवादी और सांप्रदायिक पार्टी से लड़ने के लिए बनी है. यह गठबंधन न केवल दो पार्टियों का गठबंधन है बल्कि बहुसंख्यक समाज का गठबंधन है.

मायावती ने बताया कि इस गठबंधन में कांग्रेस को क्यों शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से ज्यादातर देश और राज्यों में कांग्रेस की सरकार रही है. कांग्रेस के राज में देश और राज्यों में गरीबी और भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा. यही वजह है कि सपा और बसपा जैसी पार्टिंया अस्तित्व में आई. रक्षा सौदों में कांग्रेस और बीजेपी की रणनीति एक जैसी ही रही है. कांग्रेस की सरकार में बोफोर्स और वर्तमान की बीजेपी सरकार में अगस्ता वेस्टलैंड डील में गड़बड़ी हुई है. बोफोर्स के चलते कांग्रेस की सरकार गई, राफेल से बीजेपी की सरकार जाएगी.

मायावती ने बीजेपी की मौजूदा सरकार की तुलना इमरजेंसी से की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में घोषित इमरजेंसी थी जबकि अभी अघोषित. सरकार सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके राजनीतिक दलों को परेशान किया जा रहा है. मायावती ने स्पष्ट किया कि हम अपने अनुभवों से समझ पाए हैं कि कांग्रेस जैसी पार्टियों से गठबंधन करने पर इनका वोट हमें ट्रांसफर नहीं होता है. बल्कि उल्टा वोट बीजेपी जैसी सांप्रदायिक पार्टी को वोट चले जाते हैं. यही वजह है कि हमने कांग्रेस से गठबंधन नहीं किया है.

मायावती ने साफ तौर से कहा है कि हमने फैसला लिया है कि न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के किसी भी चुनाव में बीएसपी कांग्रेस जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन करके चुनाव में नहीं उतरेगी, क्योंकि इनका वोट बीएसपी को ट्रांसफर नहीं होता है. 

बीएसपी सुप्रीमो ने ईवीएम में गड़बड़ी का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि अगर आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने ईवीएम में गड़बड़ी नहीं की तो इनकी हार सुनिश्चित है. बीएसपी और एसपी के गठबंधन की भनक लगते ही केंद्र सरकार ने सरकारी मशीनरी को उपयोग करते हुए अखिलेश यादव को बदनाम करने की कोशिश शुरू कर दी. इस झूठे प्रपंच में बीएसपी पूरी तरह से अखिलेश यादव के साथ हैं. हम बीजेपी की इस हरकत से डरने वाले नहीं हैं.

उत्तर प्रदेश में बीएसपी 38 और एसपी 38 सीटों पर लड़ेगी. बाकी दो सीटें अन्य सहयोगी के लिए छोड़ दी हैं. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के लिए अमेठी और रायबरेली सीट छोड़ी गई हैं. हालांकि यह कोई गठबंधन के चलते नहीं लिया गया है. मायावती ने स्पष्ट तौर से कहा कि बीजेपी ने शिवपाल यादव पर जो पानी की तरह पैसा खर्च किया है, वह पूरी तरह बेकार साबित होने वाला है.