Shayari: तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे, क्या आपने पढ़ें वासिम बरेलवी के शानदार शेर

Ansh Raj
Dec 15, 2024

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे

मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा

झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए और मैं था कि सच बोलता रह गया

उस ने मेरी राह न देखी और वो रिश्ता तोड़ लिया जिस रिश्ते की ख़ातिर मुझ से दुनिया ने मुँह मोड़ लिया

उसे समझने का कोई तो रास्ता निकले मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले

क्या बताऊँ कैसा ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने किया उम्र-भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैं ने किया

दिल की बिगड़ी हुई आदत से ये उम्मीद न थी भूल जाएगा ये इक दिन तिरा याद आना भी

एक मंज़र पे ठहरने नहीं देती फ़ितरत उम्र भर आँख की क़िस्मत में सफ़र लगता है

चाहे जितना भी बिगड़ जाए ज़माने का चलन झूट से हारते देखा नहीं सच्चाई को

तुम साथ नहीं हो तो कुछ अच्छा नहीं लगता इस शहर में क्या है जो अधूरा नहीं लगता

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