बनारसी सिल्क में गिना जाने वाला एक सिल्क चंदेरी भी है जिससे बनी साड़ी को भारत समेत दुनियाभर में खूब पसंद किया जाता है. चंदेरी साड़ियों को सिको भी कहते हैं. जो चिकना और टिकाऊ होती है.
चंदेरी साड़ी को गर्मियों के लिए बहुत अच्छा माना गया है. इसमें रेश्म , शुद्ध कपास का इस्तेमाल होता है. इन पर की गई कशीदाकारी अनूठी होती है.
चंदेरी साड़ी का इतिहास पुराना है. समय के साथ इसके कपड़े में काफी बदलाव आया है. प्योर सिल्क चंदेरी के अलावा आज कॉटन चंदेरी व सिल्क कॉटन चंदेरी साड़ी भी बनती हैं.
कटान सिल्क एक तरह का रेशम होता है जो मजबूत और टिकाऊ होता है. मुलायम, हल्का और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है और इससे बने लहंगे और साड़ियां बहुत पसंद की जाती हैं.
बनारसी सिल्क की ही एक किस्म कोरा रेशम भी है जो ऑर्गेंजा नाम से जानी जाती है. इससे बनी साड़ी हल्की और आरामदायक होती है. आजकल ऑर्गेंजा साड़ी ट्रेंड में हैं.
बनारसी खादी में जॉर्जेट, शिफॉन व ब्रोकेड सिल्क के प्रकार होते हैं. जो रेशम से बने जॉर्जेट को बहुत ज्यादा मुड़े हुए धागों से बनाया जाता है. ऐसी साड़ियां भी खूब पसंद की जाती हैं.
बनारसी खादी की जॉर्जेट व ब्रोकेड साड़ियां बेहतरीन साड़ियों में गिनी जाती है. इन पर ज़री का किया काम इन्हें यूनिक बनाता है. कपड़ा अधिक टिकाऊ होता है.
टसर रेशम आमतौर पर घिचा रेशम के तौर पर जाना जाता है. दक्षिण एशिया में इसके कीट अधिक पाए जाते है जो जामुन व ओक जैसे पौधों में होते हैं. गर्मी में इससे बनी साड़ी पहनना एक अच्छा ऑप्शन है.
डुपियन शुद्ध रेशम से बना होता है जिसकी साड़ी झिलमिलाती हुई एक कुरकुरी बनावट की होती है और वजन भी कम होता है. बनारसी डुपियन सिल्क को लोग खादी सिल्क के तौर पर भी जानते हैं.