Lucknow New Mayor:लखनऊ में बीजेपी मेयर प्रत्याशी सुषमा खर्कवाल की जीत, जानिए कितने वोट से सपा प्रत्याशी को हराया
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Lucknow New Mayor:लखनऊ में बीजेपी मेयर प्रत्याशी सुषमा खर्कवाल की जीत, जानिए कितने वोट से सपा प्रत्याशी को हराया

Lucknow New Mayor: सुषमा खर्कवाल लखनऊ की नई मेयर होंगी. उन्होंने सपा प्रत्याशी वंदना मिश्रा को करारी शिकस्त दी है. खर्कवाल ने दो लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है. 

BJP mayor candidate Sushma Kharwal in Lucknow

Lucknow Mayor Chunav Result : लखनऊ नगर निगम मेयर चुनाव में बीजेपी ने पिछले तीन दशक का रिकॉर्ड कायम रखा है. बीजेपी प्रत्याशी सुषमा खर्कवाल मेयर पद का चुनाव जीत गई हैं. उन्होंने रिकॉर्ड मार्जिन से सपा प्रत्याशी को शिकस्त दी.

किसे कितने वोट
सुषमा खर्कवाल भाजपा से 366690 वोट
अंजू भट्ट  आप 17473
वंदना मिश्र सपा 216083
शाहीन बानो  बसपा 54058
संगीता जायसवाल  कांग्रेस 77599 

लखनऊ नगर निगम के 110 वार्ड हैं. यहां भाजपा 57 सपा 28 में आगे रही. जबकि कांग्रेस 7 और बसपा 4 में आगे रही. दरअसल लखनऊ नगर निगम (महापौर) इस बार महिला के आरक्षित है. इसलिये बीजेपी ने महिला मोर्चा से जुड़ी रही सुषमा खरकवाल को प्रत्याशी बनाया है. वहीं सपा ने वरिष्ठ पत्रकार वंदना मिश्रा को तो वहीं बसपा से शाहीन बानो जोकि लखनऊ उत्तर विधानसभा सीट से प्रत्याशी रहे मो. सरवर मालिक की पत्नी उम्मीदवार बनाया था. इसी तरह कांग्रेस से संगीता जायसवाल और आम आदमी पार्टी से अंजू भट्ट प्रत्याशी रहीं. इसके अलावा सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी से अल्का पांडेय, लोकदल से मधु सेन, गांधियन पीपल्स पार्टी से उषा त्रिपाठी चुनाव लड़ रही थीं. वहीं जिन्होंने निर्दलीय ताल ठोकी है, उसमें आशा मिश्रा, मिथिलेश सिंह, मंजू दोहरे, नलिनी खन्ना और लक्ष्मी कुशवाहा का नाम शामिल हैं. 

2017 में बीजेपी प्रत्याशी संयुक्ता भाटिया लखनऊ की मेयर बनीं थी. उन्हें लखनऊ की पहली मेयर बनने की उपलब्धि हासिल हुई थी. समाजवादी पार्टी की मीरा वर्धन दूसरे नंबर पर थीं. 2012 में दिनेश शर्मा मेयर निर्वाचित हुए थे. लखनऊ 1960 में नगर निगम बना था. लखनऊ नगर निगम 110 वार्डों में बंटा है. इनमें से 37 वार्ड महिलाओं के लिए रिजर्व हैं.

किसी समय कांग्रेस का वर्चस्व था

लखनऊ नगर पालिका पर लंबे समय तक कांग्रेस का वर्चस्व रहा है. नगर निगम बनने से पहले नगर पालिका परिषद के लिए  राजकुमार श्रीवास्तव 1960 से फरवरी 1961 तक नगर प्रमुख के पद पर रहे. उस समय नगर प्रमुख का चुनाव पार्षद के जरिये होता था. नगर निगम के लिए पहले फेज में वोटिंग हुई थी. राज्य की राजधानी होने की वजह से इस नगर निगम में बीजेपी और सपा दोनों के लिए यह सीट नाक की लड़ाई थी. 

 

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