Allhabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट के अहम फैसले के बाद अब हो सकेगा संभल में कल्कि मंदिर का निर्म
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Allhabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट के अहम फैसले के बाद अब हो सकेगा संभल में कल्कि मंदिर का निर्म

Allahabad High Court​ News: इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा संभल में कल्कि मंदिर के निर्माण को लेकर रास्ता साफ कर दिया गया है. कोर्ट के सुनाए निर्णय के बाद मंदिर निर्माण का काम आगे बढ़ सकेगा. दरअसल, जिला अधिकारी के आदेश को कोर्ट ने  असंवैधानिक करार दिया है.

Allahabad High Court

प्रयागराज: संभल के अचोरा कांबो गांव में कल्कि मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने इसको लेकर बुधवार को अपना फैसला सुनाया. आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी निजी भूमि पर मंदिर बनाने को रोकने संबंधी जिलाधिकारी संभल के आदेश को चुनौती दी थी. इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने असंवैधानिक बताया. कोर्ट ने आदेश दिया है कि प्रमोद कृष्णम को जिला पंचायत संभल में मंदिर का नक्शा जमा करवाना होगा. कोर्ट के द्वारा यह भी निर्देश दिया गया कि जिला पंचायत की अनुमति भी लिया जाए. 

मुस्लिम पक्ष का विरोध 

इस मामले में याचिका आचार्य प्रमोद कृष्णम की ओर से याचिका दाखिल की गई थी. इस पर न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय व न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने आदेश जारी किया है. हाईकोर्ट में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी याचिका दाखिल की, जिसमें 30 अक्टूबर 2017 को  जिला अधिकारी संभल के दिए गए आदेश को चुनौती दी गई थी. मंदिर बनाने की अनुमति देने से जिलाधिकारी ने यह कहकर मना किया कि सांप्रदायिक रूप से संभल संवेदनशील क्षेत्र है और वहां मंदिर बनाए जाने का मुस्लिम पक्ष विरोध कर रहा है. अगर मंदिर का निर्माण हुआ तो कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी होगी. मंदिर की जमीन के करीब ही सरकारी जमीन है, जिस पर याची के द्वारा अतिक्रमण किया जा सकता है. 

निजी भूमि पर ही प्रस्तावित मंदिर
जिलाधिकारी के आदेश में ये भी कह दिया गया कि नक्शा जिला पंचायत द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है. दूसरी ओर याची ने इस संबंध में कहा कि जिला पंचायत में वो  मंदिर के नक्शे को जमा करवाने को भी तैयार हैं, पर जिलाअधिकारी का आदेश कहीं जिला पंचायत को नक्शा मंजूर करने में समस्या पैदा न कर दे. इस पर कोर्ट ने कहा है कि इसमे विवाद नहीं कि याची द्वारा अपनी निजी भूमि पर ही प्रस्तावित मंदिर को बनाया जा रहा है. निजी जमीन पर मंदिर बनाने का अधिकार उसे संविधान से प्राप्त है. 

अनुच्छेद 25 व 26 के तहत संरक्षित 
कोर्ट ने कहा धर्मस्थल निर्माण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 के तहत संरक्षित है. कोर्ट ने जिलाधिकारी की मंदिर निर्माण से कानून व्यवस्था की समस्या पैदा होने से जुड़ी आशंका को भी निर्मूल बताया. कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष के विरोध से जुड़े कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं हुए. कानून व्यवस्था कायम रहे यह जिम्मेदारी प्रशासन की है.

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