Jyotish Shastra For Bharat: ग्रहों का राशि परिवर्तन ज्योतिष शास्त्र में महत्वपूर्ण बताया गया है. जब कोई ग्रह अपनी स्थिति बदलकर दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो वह राशि परिवर्तन कहलाता है. इस परिवर्तन से सभी व्यक्ति के जीवन में विभिन्न परिवर्तन आते हैं. यह परिवर्तन व्यक्ति के जीवन में खुशियों, चुनौतियों और अनुभवों को प्रभावित कर सकता है. ज्योतिषी इसे महसूस करके आने वाले समय की भविष्यवाणी करते हैं. इस साल 3 अक्टूबर को मंगल तुला राशि में प्रवेश करेगा, और वहां पहले से गोचर कर रहे केतु के साथ उनका संयोग होगा. ज्योतिष की दुनिया में मंगल और केतु की युति को अशुभ माना जाता है. इस संयोजन का प्रभाव पूरे अक्टूबर मास में महसूस किया जा सकता है. इसका बेहद अशुभ असर पूरे भारत पर पड़ेगा.


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भारत और कनाडा
ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, मंगल और केतु की युति तुला राशि में होने से इसका असर कनाडा की स्थापना कुंडली पर भी होगा, जहां यह अष्टम भाव में बैठे शनि पर प्रभावित होगा. अष्टम भाव रहस्य, षड्यंत्र और विदेशी संबंधों में तनाव का सूचक है. इसका प्रभाव भारत और कनाडा के संबंध पर पड़ेगा, जिससे इन दोनों देशों के बीच राजनीतिक विवाद में वृद्धि हो सकती है.


भारत और कश्मीर
आश्विन मास में पांच शनिवार आ रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब एक महीने में पांच शनिवार या मंगलवार होते हैं, और पापी ग्रहों की युति होती है, तो ऐसे समय में अन्याय, दुर्घटनाएं और अशुभ घटनाएं हो सकती हैं.  तुला राशि कश्मीर को प्रतिनिधित करती है. ऐसे में तुला राशि में मंगल और केतु की युति के चलते उत्तर भारत और कश्मीर में कुछ अशुभ घटनाएं हो सकती हैं. 


भारत और मौसम
इसके अलावा, ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, दक्षिण भारत में उत्तरपूर्व मानसून में वर्षा में कमी हो सकती है, जिससे आगामी रबी मौसम में फसलों पर असर पड़ सकता है. उत्तर भारत में भी अक्टूबर में तापमान में वृद्धि हो सकती है.


(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)