Reserve Bank of India: रिजर्व बैंक ऑफ इंड‍िया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने वित्त वर्ष 2022-23 में व‍िकास दर 7 प्रतिशत के अग्रिम पूर्वानुमान से ज्‍यादा रहने की उम्मीद जतायी. उन्होंने कहा कि तीसरी और चौथी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों के तेज रहने से यह होने की संभावना है. एनएसओ (NSO) ने फरवरी में जारी दूसरे अग्रिम अनुमान में कहा था कि वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8 प्रतिशत रहेगी. वित्त वर्ष 2021-22 में यह 8.7 प्रतिशत रही थी.


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31 मई को जारी होंगे आंकड़े


दास ने उद्योग मंडल सीआईआई (CCI) के कार्यक्रम में कहा, 'संभावना है कि वृद्धि दर इस अनुमान से भी अधिक रह सकती है. अगर पिछले वित्त वर्ष की जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत से अधिक रहती है तो आर्श्‍चय नहीं होगा.' 31 मार्च को खत्‍म हुए वित्त वर्ष 2022-23 की वृद्धि के बारे में अस्थायी वार्षिक अनुमान 31 मई को जारी किए जाएंगे. दास ने वृद्धि दर अधिक रहने की संभावना के पीछे की वजह बताते हुए कहा, 'तीसरी तिमाही में ऐसा लगा था कि रुकी हुई मांग आने से आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल रहा है. लेकिन चौथी तिमाही में सभी आर्थिक संकेतकों से यही लगा कि आर्थिक गतिविधियों ने तेजी पकड़ ली है.'


7 प्रतिशत से अधिक रहती है व‍िकास दर
उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की निगरानी में शामिल सभी 70 संकेतकों ने चौथी तिमाही में तेजी की रफ्तार कायम रहने के संकेत दिए. उन्होंने कहा, 'ऐसी स्थिति में अगर वृद्धि दर 7 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रहती है तो हमें आर्श्‍चचक‍ित नहीं होना चाहिए.' जहां तक चालू वित्त वर्ष का सवाल है तो आरबीआई (RBI) ने इस साल वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. आरबीआई गवर्नर ने नीतिगत ब्याज दर में वृद्धि का सिलसिला रोकने की मांग पर कहा कि ऐसा करना उनके हाथ में नहीं है क्योंकि यह जमीनी स्थिति पर निर्भर करता है.


रेट रेट को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखकर हैरान क‍िया
अप्रैल में आरबीआई ने रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखते हुए हैरान कर दिया था. इससे पहले केंद्रीय बैंक मई, 2022 से रेपो रेट में ढाई प्रतिशत का इजाफा कर चुका है। दास ने कहा कि आगामी मौद्रिक समीक्षा बैठकों में रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं करने संबंधी सुझाव आरबीआई के पास आए हैं। लेकिन ऐसा करना उनके हाथ में नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यह जमीनी स्थिति पर निर्भर करता है. जो कुछ उस समय हो रहा है मुझे उसके हिसाब से फैसला करना है. यह देखना है कि रुझान क्या है. क्या मुद्रास्फीति बढ़ रही है या नरम हुई है.’


आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अप्रैल की मौद्रिक समीक्षा के दौरान रेपो रेट में इजाफे पर लगाम लगने का सवाल है तो उसे एक विराम के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि र‍िटेल महंगाई दर नरम हुई है लेकिन अभी इस मोर्चे पर कोताही बरतने की गुंजाइश नहीं है.