IAS Smita Sabharwal Success Story: यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम की तैयारी  करने वाले कैंडिडेट्स रोजाना 14 से 15 घंटे की पढ़ाई करते हैं. हालांकि, सभी यूपीएससी एस्पिरेंट्स को पहले ही प्रयास में सफलता मिलना तो असंभव हैं. ऐसे में ज्यादातर उम्मीदवार सफलता पाने के लिए लगातार ज्यादा मेहनत करने में जुट जाते हैं.


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वे कई प्रयासों के बाद मंजिल हासिल कर लेते हैं. क्योंकि उन्हें खुद पर पूरा यकीन होता है. ऐसा कुछ आईएएस स्मिता सभरवाल ने कर दिखाया, जिन्होंने दूसरी बार में चौथी रैंक हासिल कर मिसाल पेश कर दी. आज इस आर्टिकल में पढ़िए आईएएस अधिकारी स्मिता सभरवाल की सफलता की तहानी.


स्मिता सभरवाल शुरू से रही है अव्वल
साल 2000 में स्मिता सभरवाल ने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी में सफलता पाई थी. वह अपने पहले प्रयास में प्रीलिम्स भी क्वालीफाई नहीं कर पाई थीं. स्मिता ने केवल 23 साल की उम्र में यूपीएससी क्रैक किया था. बचपन से ही पढ़ने में आगे रहीं स्मिता ने बोर्ड परीक्षा में भी टॉप किया था. 


मूल रूप से दार्जिलिंग की रहने वाली आईएएस स्मिता के पिता कर्नल पीके दास रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर हैं, वह खुद को आर्मी ब्रैट कहती हैं. हैदराबाद में मेरेडपल्ली के सेंट एंस से स्कूली शिक्षा हासिल करने वाली स्मिता ने कक्षा 12वीं में ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक हासिल की थी.  इसके बाद उन्होंने सेंट फ्रांसिस डिग्री कॉलेज फॉर वूमेन से बीकॉम की डिग्री ली.


सोशल मीडिया पर रहती हैं एक्टिव
आईएएस स्मिता सभरवाल सबसे एक्टिव आईएएस अफसरों में से एक हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर उनके 4 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. ट्विटर पर वह महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय साझा करती रहती हैं. इसके अलावा वह इंस्टाग्राम पर भी अक्सर अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करती रहती हैं. एक आईएएस अधिकारी के तौर पर स्मिता के काम की बहुत सराहना होती है.