कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है.... इन पंक्तियों को भला किसने नहीं गुनगुनाया होगा. हिंदी के मशहूर कवि, राजनेता और लेक्चरर कुमार विश्वास की लिखी कविताओं का हिंदी साहित्य में विशेष योगदान रहा है. वह हिंदी फिल्मों में लेखन के क्षेत्र में काम कर चुके हैं और आज भी कर रहे हैं. उनके लिखे गानों पर अक्षय कुमार थिरक चुके हैं तो उनके लिखे डायलॉग पर अभिषेक बच्चन दमक उठे हैं. 10 फरवरी को कुमार विश्वास का  जन्मदिन है. इस मौके पर उन्होंने 'जी न्यूज' के साथ खास बातचीत की और बताया कि आखिर क्यों वह मुंबई से कटे-कटे रहते हैं.


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Kumar Vishwas Birthday: फिल्मों में काम करने पर कुमार विश्वास ने कहा, 'मेरी फिल्मों में कोई खास रुचि नहीं है. मैं यहां के भागदौड़ वाले कंटेंट से प्रभावित नहीं होता. मुझे रचनात्मक काम का सम्मान है. मगर इंडस्ट्री में लोगों के पास समय नहीं है. अफरा-तफरी में काम करना चाहते हैं. ऐसे में हम स्टेज से जुड़े रहने वाले लोग कतरा जाते हैं. मैं पर्सनली ऐसे काम में विश्वास रखता हूं जिसका अर्थ व इम्पेक्ट हो. काम चलाऊ चीजें नहीं पसंद है.' आगे वह बताते हैं कि मुंबई में काम बहुत जल्दबाजी में होता है. इसका कारण है बाजारवाद. हर किसी को ज्यादा से ज्यादा प्रोजेक्ट बनाने हैं और बेचने हैं.


कुमार विश्वास की फिल्मों में जर्नी



फिल्मों के जर्नी के बारे में बात करते हुए कुमार विश्वास बताते हैं कि मूल रूप से उनकी इस जर्नी की शुरुआत लिरिसिस्ट के तौर पर हुई, जब उन्होंने साल 2018 में जॉन अब्राहम की फिल्म 'पोखरण' के लिए गाने लिखे. आगे चलकर उन्होंने अभिषेक बच्चन की फिल्म 'दसवीं' में डायलॉग लिखे और कथाक्रम पर काम किया.


कुमार विश्वास के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स
Kumar Vishwas मौजूदा समय में बॉलीवुड के कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. उन्होंने अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के बारे में बात करते हुए बताया कि वह 'दसवीं' के सीक्वल 'डिग्री', वासु भगनानी की 'कर्ण' और एक अन्य प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. 


'मिशन रानीगंज' का गाना सिर्फ 3 दिन में लिखा



फिल्मों में बतौर लेखक व लिरिसिस्ट काम करने के अनुभव पर वह बताते हैं कि जब उन्हें अक्षय कुमार की 'मिशन रानीगंज' में 'जीतेंगे'गाने के लिए अप्रोच किया गया तो उन्हें सिर्फ 3 दिन का समय दिया गया था. ऐसे में उनकी कोशिश थी कि वह एक ऐसा गीत लिखे जिनके हरेक शब्द का अर्थ हो और गहरा असर छोड़े.


पुराने गानों के साथ छेड़छाड़ पर क्या बोले कुमार विश्वास
कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर पुराने गानों को नए फ्यूजन व तड़का लगाने वाले ट्रेंड पर भी रिएक्ट किया. उनका मानना है कि पुराने गाने तो पहले से ही संपूर्ण हैं, पॉपुलर है तो ऐसे में अपने टेलेंट को कुछ नया करने पर फोकस करेंगे तो ज्यादा अच्छा रिजल्ट मिल सकता है.


कुमार विश्वास की पर्सनल लाइफ



10 फरवरी 1970 में बसंत पंचमी के दिन कुमार विश्वास का जन्म हुआ. गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में जन्मे विश्वास 5 भाई बहनों में सबसे छोटे हैं. उनके पिता तो उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे मगर कुमार का मन हिंदी में ही लगता था. बस फिर क्या उन्होंने अपने मन की सुनी और इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर हिंदी साहित्य में पढ़ाई करनी शुरू की. उनके लिखे शब्दों में ऐसा जादू होता है कि कवि सम्मेलन और मुशायरों में का रंग ही बदल जाता है. 


वो कविता, जिसने सब बदलकर रख दिया
उनकी लिखी एक रचना तो इतनी पॉपुलर हुई कि देश ही नहीं विदेश तक भी कुमार विश्वास को कविता पाठ के लिए बुलाया जाने लगा. आगे चलकर उन्होंने किताबें भी लिखीं. साथ-साथ उनका राजनैतिक करियर भी शुरू हुआ.


कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !! 


मायानगरी और कुमार विश्वास
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कुमार विश्वास की जर्नी की बात करें तो वह 'इंडियन आइडल' और 'सा रे गा मा पा लिटिल चैम्पस'में बतौर गेस्ट भी नजर आए. आगे चलकर उन्होंने जॉन अब्राहम की फिल्म 'परमाणु' में 'दे दे जगह' गाना लिखा. साल 2017 में वह जब राहत इंदोरी के साथ 'द कपिल शर्मा' शो में आए तो वो एपिसोड भी काफी पॉपुलर हुआ था. आज भी यूट्यूब पर इस एपिसोड को साढ़े छह करोड़ से ज्यादा लोगों ने पसंद किया.