Lok Sabha Election 2024 Saran Seat: बिहार में राहुल सांकृत्यायन की कर्मभूमि रहे सारण की सीट का इतिहास भी काफी अनूठा रहा है. 1977 तक इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस का दबदबा था लेकिन लालू परिवार ने इस सीट पर कांग्रेस के दबदबे को खत्म कर दिया. इसके बाद राजद ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि यह सीट उनके हाथ से भी फिसल जाएगी. इस सीट पर लगातार अभी भाजपा का कब्जा है. 


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इस जिले नें बिहार को 6 मुख्यमंत्री दिए हैं ऐसे में आप स्वतः अंदाजा लगा सकते हैं कि इस सीट का राजनीतिक इतिहास कितना समृद्ध रहा होगा. गंगा, सोन और सरयू नदी के तट पर बसा यह सारण केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, साहित्यिक और राजनीतिक रूप से भी काफी समृद्ध रहा है. 


1977 में जेपी आंदोलन के समय जेपी लहर में कांग्रेस के इस किले को ध्वस्त किया गया तो वहीं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के तैयार किए गए इस सियासी किले को 1996 में भाजपा के कद्दावर नेता और अभी राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने गिरा दिया. बता दें कि ये वही सारण लोकसभा सीट है जहां से लालू यादव चार बार लोकसभा जीतकर पहुंचे. जब चारा घोटाले में उनको सजा हुई और उनकी सांसदी चली गई तो 
वह इसी सीट से सांसद थे. 


मजे की बात यह है कि इस सीट पर राजीव प्रताप रूडी ने लालू के समधी चंद्रिका राय और पत्नी राबड़ी जैसे राजनीति कि दिग्गजों को मात दी है. यह सीट हालांकि 2008 के परिसीमन के बाद सारण लोकसभा सीट के नाम से जाना जाने लगा. इससे पहले इस सीट को छपरा संसदीय सीट के नाम से जाना जाता था. 


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यहां इस सीट का चुनाव इस मायने में खास है कि यहां हर बार मुकाबला रघुवंशी बनाम यदुवंशी होता है. मतलब या तो राजपूत या फिर यादव इस सीट पर संसद बनने का गौराव इन्हीं दो जाति के लोगों को अबतक प्राप्त हुआ है. इस लोकसभा सीट के पास 10 विधानसभा क्षेत्र है लेकिन इसके चार विधानसभा क्षेत्र को महराजगंज लोकसभा सीट से जोड़ा गया है. ऐसे में परसा, सोनपुर, गड़खा, मढौरा, अमनौर और छपरा सदर वाली 6 विधानसभा सीटों पर सारण लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण भी हमेशा से अलग-अलग रहे हैं. 


विश्वप्रसिद्ध सोनपुर मेला सारण जिले में ही लगता है. हालांकि इसके अलावा भी यहां दर्जनों दर्शनीय स्थल हैं जो इस जिले को एक अलग पहचान देते हैं. सोनपुर का रेलवे प्लेटफार्म भी भारत में सबसे बड़ा है. इसके साथ ही यहां का हरिहरनाथ मंदिर तो विश्व प्रसिद्ध है.