पटना  : बिहार की राजनीति में न्यौते का महत्व बहुत ज्यादा है. बिहार की राजनीति इसी की परिधि में घूमती है और न्योते से बहुत कुछ अंदाजा लग जाता है. साल 2010 का वह न्यौता याद होगा जब बिहार में भाजपा के समर्थन से नीतीश सरकार चला रहे थे और नरेंद्र मोदी भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने बिहार आए थे. उस समय नरेंद्र मोदी के खिलाफ गुजरात दंगे को लेकर नीतीश काफी मुखर थे. नीतीश ने भाजपा कार्यकारिणी में शामिल होने के लिए आए नेताओं के लिए भोज का आयोजन किया था और ऐन मौके पर नीतीश ने भोज रद्द कर दिया. उस समय बिहार ही नहीं पूरे देश में भाजपा और जदयू के बीच खटास की खबरें आने लगी थी और 2013 में तो जैसे ही भाजपा ने नरेंद्र मोदी को पीएम पद के चेहरे के तौर पर घोषित किया नीतीश ने NDA का हाथ छोड़ दिया. आपको बता दें कि ऐसा ही कुछ अब देखने को मिल रहा है तेजस्वी यादव को बेटी हुई है और अभी तक नीतीश कुमार ने उनको बधाई नहीं दी है. 


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ऐसे में आपको बता दें कि बिहार की राजनीति कौन सी करवट लेनेवाली है यह यहां के न्यौता परंपरा से ही स्पष्ट हो जाता है. यहां सरकार का बनना बिगड़ना न्यौते पर ही निर्भर करता है. बिहार में लालू यादव ने पहली बार नीतीश को इफ्तार पार्टी के लिए न्यौता दिया तो महागठबंधन की पहली सरकार भूमिका में आई. राजद-जदयू ने हाथ मिलाया और सरकार का गठन किया. दूसरी बार भी नीतीश राबड़ी के बुलावे पर इफ्तार पार्टी में पहुंचे तो महागठबंधन की सरकार का गठन हुआ और आज भी वह सरकार बिहार में चल रही है. 


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बता दें कि मकर-संक्रांति पर दही-चूड़ा का न्यौता हो या होली मिलन समारोह बिहार की राजनीति में इन न्यौतों का असर देखिए तो आपको पता चल पाएगा. हाल ही में रवि शंकर प्रसाद के न्यौते पर मुकेश सहनी, उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान होली मिलन समारोह में पहुंचे तो सभी समझ गए थे कि अब बिहार की राजनीति में क्या होनेवाला है. अब बिहार में नीतीश कुमार भाजपा के एमएलसी और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय मयूख के न्यौते पर चैती छठ का प्रसाद खाने उनके घर पहुंच गए तो बिहार का सियासत का तापमान बढ़ गया. ऐसे में एक बार फिर से बिहार की न्यौते वाली राजनीति की चर्चा तेज हो गई. राजनीतिक जानकार मानने लगे कि एक बार फिर से नीतीश कुमार पाला बदलने के मुड में हैं. 


अब आखिर इस न्यौता प्रकरण की चर्चा में आने और नीतीश के खफा होने में लालू परिवार के न्यौते की वजह बनने के पीछे का कारण समझिए. बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के घर लक्ष्मी आई है. लालू परिवार इससे बेहद खुश है. बता दें कि लोगों को इस बात से बड़ा आश्चर्य हुआ कि हर मौके पर तुरंत झटपट प्रतिक्रिया देने वाले नीतीश कुमार ने अपनी सरकार के उप मुख्यमंत्री को ना तो बधाई दी और हां सफाई जरूर दे दी कि उनको अभी तक लालू परिवार से न्यौता नहीं मिला है जब न्यौता मिलेगा तो वह जरूर जाएंगे. ऐसे में अब राजनीति के जानकार इस बात का अनुमान और गहराई से लगाने लगे हैं कि बिहार की राजनीति करवट लेने वाली है और जल्द ही नीतीश कुमार अपने अगले कदम से सबको चौंकाने वाले हैं.