Enforcement Directorate: प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड में अवैध तरीके से जमीन हथियाने मामले में 161.64 करोड़ रुपए की जमीन अटैच की है. इस मामले में अब तक ED ₹236 करोड़ की संपत्ति अटैच कर चुकी है. एजेंसी ने यह कार्रवाई झारखंड में चल रहे जमीन घोटाले में की है, जो जमीन रांची में अटैच की गई है वह आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर अपने कब्जे में ले ली थी. इस मामले में एजेंसी अब तक 14 आरोपियों को गिरफ़्तार किया है जिसमें IAS अधिकारी भी शामिल हैं. 


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दरअसल, ये सभी लोग आपस में मिल कर रांची की जमीनों के फर्जी दस्तावेज बनाकर अपने कब्जे में लेते थे जिसमें सरकारी अधिकारी इनकी मदद करते थे. इस मामले में गिरफ्तार आरोपी IAS छवि रंजन, अमित अग्रवाल, दिलीप घोष, विष्णु कुमार अग्रवाल, प्रेम प्रकाश, अफसर अली, इम्तियाज अहमद, प्रदीप बागची, मोहम्मद सद्दाम हुसैन, तल्हा खान, भानू प्रताप प्रसाद और फ़ैयाज़ खान, राजेश राय और भरत प्रसाद हैं.


जानकारी के मुताबिक इस मामले में एजेंसी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी पूछताछ करना चाहती है और उन्हें पूछताछ के लिए तीसरी बार नोटिस दिया गया है. इससे पहले एजेंसी ने 14 और 24 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन वो नहीं आए थे. अब एजेंसी ने 9 सितंबर को पूछताछ के लिए फिर से बुलाया है. इससे पहले नवंबर 2022 में एजेंसी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अवैध खनन मामले में पूछताछ की थी. इसका मतलब यह हुआ कि दो अलग-अलग मामलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एजेंसी की जांच के दायरे में हैं.


हैरानी की बात यह भी है कि ये आरोपी साल 1932 के जमीन के दस्तावेज बना लोगों की जमीनों को कब्जा लिया करते थे और पीड़ितों को कहते थे उनकी जमीने तों उनके पिता या दादा बेच के जा चुके हैं. इन आरोपियों ने सेना को लीज पर दी गयी ज़मीन को भी धोखे से कब्ज़ा कर दूसरी जगह बेच दी थी. एजेंसी ने इनके पास से सैकड़ों की तादाद में फर्जी डीड बरामद की है. यह मामला झारखंड का है लेकिन इसके तार बिहार और कोलकाता तक जुड़े हुए हैं.


असल में आरोपी जमीन कब्जाने के लिए आजादी से पहले के दस्तावेजों का हवाला दे और 1932 के दस्तावेज बना जमीन कब्ज़ा करते थे और कहते थे कि जब पूरा पश्चिम बंगाल था जिसमें बिहार और झारखंड का हिस्सा था तब से जमीन उनके पास है, जिसमें प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह की ज़मीनें शामिल हैं. एजेंसी ने इनके पास से बरामद दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच करवाई तो पता चला कि सभी दस्तावेज फर्जी हैं. जिन जिलों के नाम आजादी से पहले नहीं होते थे उस पते पर आजादी से पहले के दस्तावेज पिन नंबर 1970 के दशक में आया, लेकिन पुराने दस्तावेजों में पिन नंबर लिखा जाना. इस तरह कीं छोटी छोटी गलतियों के बाद इन आरोपियो को गिरफ़्तार किया गया था.


इस मामले में एजेंसी ने दो चार्जशीट दाखिल की जिसमें पहली चार्जशीट 12 जून 2023 को दाखिल की थी और दूसरी चार्जशीट 1 सितंबर 2023 को दाखिल की है. इसके अलावा एजेंसी ने अब तक इस मामले में ₹236 करोड़ की संपत्ति अटैच की है जिसमें ₹74.39 करोड़ की संपत्ति पहले अटैच की गई थी और अब ₹161.64 करोड़ की संपत्ति अटैच की है जिसमें रांची की प्राइम लोकेशन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए हथियाई गई ज़मीनें शामिल हैं.