Chhattisgarh 22th Foundation Day: श्यामदत्त चतुर्वेदी/नई दिल्ली: 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का निर्माण हुआ और राज्यों के सूची में छत्तीसगढ़ के रूप में 26वां राज्य जुड़ा. उस समय देश में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. राज्य के निर्माण से उन्हें लेकर एक रोचक किस्सा भी जुड़ा है. आज हम छत्तीसगढ़ के 22वें स्थापना दिवस के मौके पर राज्य के निर्माण की वही रोचक कहानी बताने जा रहे हैं.


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अटल बिहारी को छत्तीसगढ़िया संस्कृति से लगाव था
अटल जी ( Atal Bihari Vajpayee ) ने 1990 से ही तय किया था कि छत्तीसगढ़ को एक राज्य बनाना है. अटल बिहारी छत्तीसगढ़िया आदिवासी संस्कृति और वन संपदा से काफी लगाव रखते थे. इसी कारण लोगों के छत्तीसगढ़ राज्य के सपने को साकार किया और 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का निर्माण हुआ. इसके पीछे भी उनका एक वादा है जो उन्होंने जनता से वोट के बदले किया था.


पहले जान लें छत्तीसगढ़ मांग की कहानी
अलग छत्तीसगढ़ बनाने की मांग केंद्र में रखकर आचार्य नरेंद्र दुबे ने 1965 में ‘छत्तीसगढ़ समाज’ की स्थापना की. 1967 में डॉ. खूबचंद बघेल ने ‘छत्तीसगढ़ी भ्रातृ संघ’ बनाकर मांग को नयी जान दी. इसके बाद चंदूलाल चंद्राकर ने सर्वदलीय मंच के जरिए मांग को बुलंद किया, लेकिन उनकी मौत के बाद मंच बिखर गया. इसके बाद विद्याचरण शुक्ल इस आंदोलन में कूद पड़े.


11 सांसद के बदले हुई अटल प्रतिज्ञा
विद्याचरण शुक्ल की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई. इसी दौरान साल 1998-99 के चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी ने रायपुर पहुंचे. उन्होंने सप्रेशाला मैदान से छत्तीसगढ़ राज्य का वादा किया और शर्त रखी की उन्हें इसके बादले 11 सांसद चाहिए. चुनाव रिजल्ट में BJP के खाते में केवल 8 सांसद ही मिले, लेकिन केंद्र में उनकी सरकार बन गई.


सरकार बनते ही निभाया वादा
सरकार बनने के साथ ही अटल जी की सरकार में 25 जुलाई 2000 मध्यप्रदेश राज्य पुनर्निर्माण विधेयक- 2000 लोकसभा में पेश हुआ. इसके बाद 31 जुलाई 2000 को लोकसभा में और 9 अगस्त को राज्य सभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण पर मुहर लग गई. 25 अगस्त को राष्ट्रपति ने इसे मंदूरी दे दी. 4 सिंतबर 2000 को राजपत्र में प्रकाशन के बाद 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया और अटल प्रतिज्ञा पूरी हुई.


जनता ने भी दिया था रिटर्न गिफ्ट
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद अटल बिहारी वाजपेयी नवंबर 2003 के चुनावों में प्रचार करने के लिए अंबिकापुर पहुंचे थे. इस दौरान उन्हें सुनने के लिए रिकॉर्ड 1 लाख से अधिक लोग पहुंचे. परिणामों में पहली बार ऐसा हुआ था कि कांग्रेस के वर्चस्व वाली सरगुजा की 8 सीटों में से 7 भाजाप के पास चल गईं हों और नए राज्य के गठन के बाद पहले चुनाव में भाजपा की सरकार बन गई.