कर्ण मिश्रा/जबलपुर: मध्य प्रदेश में शराब ठेकेदारों और राज्य सरकार के बीच चल रहा विवाद आखिरकार थम गया है. शराब ठेकेदारों की ओर से दायर की गई करीब 37 याचिकाओं का हाईकोर्ट ने निराकरण करते हुए फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने मुख्य मांगों को नामंजूर करते हुए ठेकेदारों को बड़ा झटका दिया है. साथ ही हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि ठेका होने के बाद नियमों के मुताबिक ठेकेदार पीछे नहीं हट सकता है.


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वसूली गई 25% अतिरिक्त टेंडर फीस वापसी सहित अन्य मांगे खारिज
ठेकेदारों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर नीलामी की रकम कम करने या ठेके निरस्त करने की मांग उठाई थी. ठेकेदारों का कहना था कि जब मार्च में शराब के ठेके हुए तो नियम साल भर के हिसाब से बनाए गए थे लेकिन कोविड-19 के चलते शराब दुकानें बंद रहीं. फिर जब शराब ठेके खोलने के आदेश हुए तो ऐसे कई नियम बना दिए जिससे ठेकेदारों को काफी नुकसान हुआ है. लिहाजा ठेकों को निरस्त किया जाए या फिर नीलामी की रकम को कम किया जाए.


वहीं, सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि ठेके के नियमों के मुताबिक सरकार के पास अधिकार है कि वो समय के साथ अपने नियमों में बदलाव कर सकती है.


हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 29 जून को फैसला सुरक्षित रख लिया था. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकार नए सिरे से ठेके जारी नहीं करेगी, जो ठेके पहले हो चुके हैं उसी के मुताबिक शराब ठेकेदारों को उनको चलना होगा. साथ ही ठेकेदार चाहें तो सरकार के समक्ष ठेके की दो माह की अवधि बढ़ाने का आवेदन कर सकते हैं. जिसके लिए सरकार द्वारा पहले ही स्वकृति प्रदान की गई है.