PFI conspiracy against PM Narendra Modi: बिहार में पटना जिले के फुलवारी शरीफ इलाके से गिरफ्तार हुए PFI सदस्यों से हुई पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं. इस मामले में अब तक राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.  उनसे हुई पूछताछ में पता चला है कि कथित तौर पर उनके निशाने पर पीएम नरेंद्र मोदी थे. वे उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए बड़े लेवल पर प्लानिंग कर रहे थे. 


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पटना में PFI के 5 लीडर अरेस्ट


पटना पुलिस ने बहुसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए समुदाय विशेष को ट्रेनिंग दे रहे झारखंड के सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद जलालुद्दीन (Mohammad Jalaluddin) और अतहर परवेज को फुलवारी शरीफ इलाके से गिरफ्तार किया था. इसके बाद उनसे पूछताछ में तीन और व्यक्तियों मार्गूब दानिश, अरमान मलिक और शब्बीर का नाम सामने आया, जिसके बाद उन्हें भी अरेस्ट कर लिया गया है. पुलिस ने कहा कि वे मुस्लिम युवकों का ब्रेनवॉश कर एक आतंकी मॉड्यूल चला रहे थे. 


सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए पांचों लोग बिहार विधानसभा के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान पीएम मोदी पर हमला करने की योजना बना रहे थे. इसके लिए उन्होंने 6 और 7 जुलाई को एक गुप्त बैठक भी की. प्रधानमंत्री ने 12 जुलाई को यह दौरा किया था. इससे पहले ही अतहर परवेज और मोहम्मद जलालुद्दीन को बिहार पुलिस ने 11 जुलाई को फुलवारी शरीफ से गिरफ्तार कर लिया था. 


SIMI पर बैन के बाद बना था PFI


अतहर परवेज पहले स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) में था. जब उस पर बैन लगा तो वह पीएफआई (PFI) में शामिल हो गया. वह आतंकवादी मंजर परवेज का भाई है. वह नवंबर 2013 में पटना गांधी मैदान में हुई नरेंद्र मोदी की रैली में सीरियल ब्लास्ट करने के मामले में शामिल था. वह झारखंड में तैनात रहे मोहम्मद जलालुद्दीन के घर में पनाह लेता था.


जांच में पता चला है कि मोहम्मद जलालुद्दीन (Mohammad Jalaluddin) 20 नवंबर 2018 से 27 जनवरी 2021 तक झारखंड के गिरिडीह जिले के भेलवाघाटी थाने में एसएचओ था. वह पुलिस अधिकारी के भेष में एक कट्टरपंथी मुसलमान था, जो कानूनी मुद्दों में मुसलमानों को समर्थन देता था. वह मुसलमानों को घर बनाने, शादी करने और दूसरे सामुदायिक कार्यों में मदद करता था. उसके झारखंड के गिरिडीह जिले में बड़ी संख्या में रहने वाले कई कट्टरपंथी मुस्लिम युवाओं के साथ अच्छे संबंध बताते जाते हैं. गिरफ्तारी से ठीक पहले जलालुद्दीन कई युवकों के संपर्क में था. जांच एजेंसियां अब उसके नेटवर्क की जांच कर रही हैं.


आरोपियों के खाते में आए लाखों रुपये


पटना पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक अतहर परवेज और जलालुद्दीन (Mohammad Jalaluddin) के तीन बैंक खाते हैं. जिसमें 14 लाख रुपये, 30 लाख रुपये और 40 लाख रुपये के तीन थोक लेनदेन किए गए हैं. वे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया की जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली बैठकों में शामिल होते  थे. इस दौरान देश विरोधी साजिशें तैयार की जाती थीं. पुलिस ने उनके बयान के आधार पर 26 अन्य लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है. जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, उनके नाम पीएफआई बिहार-बंगाल क्षेत्रीय समिति के सचिव मोहम्मद रसलान, पीएफआई के राष्ट्रीय स्तर के नेता मोहम्मद रियाज, बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के पीएफआई निदेशक मोहम्मद अंसारुल हक, मोहम्मद अमीन आलम समेत कई लोग शामिल हैं. इसके साथ ही बिहार पुलिस के एटीएस ने तीसरे आरोपी अरमान मलिक को भी गिरफ्तार कर लिया है.


वर्ष 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने की साजिश


पुलिस ने जलालुद्दीन (Mohammad Jalaluddin) और परवेज के पास से सनसनीखेज दस्तावेज बरामद किए हैं, जिसमें लिखा है कि वे 2047 तक भारत को इस्लामिक स्टेट बना देंगे. आरोप है कि वे फिजिकल ट्रेनिंग के नाम पर देशभर से मुस्लिम युवाओं को बिहार में बुलाकर उनका ब्रेनवाश कर रहे थे और बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा के लिए भड़का रहे थे. 


बिहार पुलिस के डीजीपी एसके सिंघल ने कहा, 'अभी जांच चल रही है. हम इस तरह की आतंकी या आपराधिक गतिविधियों का भंडाफोड़ करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं. केंद्र और राज्य की एजेंसियां इसकी हर एंगल से जांच कर रही हैं.'


केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में हुईं शामिल


उधर बिहार में संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का पता चलने के बाद कई केंद्रीय जांच एजेंसियां भी इस मामले में शामिल हो गई हैं. ईडी की टीम इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एंगल और विदेशी फंडिंग की जांच कर रही है. वहीं सूत्रों के मुताबिक एनआईए ने भी इस मामले की समानांतर जांच शुरू कर दी है. हालांकि एनआईए ने अभी इस मसले पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन संभावना है कि आने वाले दिनों में मामले को जांच एजेंसी को स्थानांतरित किया जा सकता है. वहीं खुद को कानूनी मामले में घिरता देख पीएफआई ने दावा किया है कि उसने कभी कोई आपत्तिजनक दस्तावेज प्रकाशित नहीं किया है. 


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