Rajasthan Election 2023: राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार 200 विधानसभा क्षेत्रों में 5 करोड़ 26 लाख मतदात नई सरकार चुनेंगे. मतदाता सूची का फाइनल पब्लिकेशन होने के बाद तस्वीर साफ हो गई हैं. इस बार के चुनाव में युवा और महिला मतदाता नई सरकार बनाने के लिए निर्णायक भूमिका में रहेंगे. पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में पांच साल में प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों पर 48 लाख 91 हजार 545 मतदाताओ की संख्या में इजाफा हुआ हैं.


200 विधानसभा क्षेत्रों में 5 करोड़ से ज्यादा मतदाता


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प्रदेश में आगामी दिनों में होने वाले विधानसभा चुनाव में 51 हजार 756 मतदान केंद्रों पर 5.26 करोड़ से ज्यादा वोटर्स सरकार का चुनाव को चुनेंगे. मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन करने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रवीण गुप्ता ने बताया की विधानसभा चुनाव 2023 में 18 से 19 साल के 22 लाख 4 हजार 514 मतदाता पहली बार वोट करेंगे.


नई लिस्ट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है. अब 1 हजार पुरुषों की तुलना में 920 महिलाएं हैं. गुप्ता ने बताया की वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन के बाद राज्य में कुल 5 करोड़ 26 लाख 80 हजार 545 मतदाता हो गए हैं. इनमें से 2 करोड़ 73 लाख 58 हजार 627 पुरूष और 2 करोड़ 51 लाख 79 हजार 422 महिला मतदाता हो गई हैं. उन्होंने बताया की 80 वर्ष से अधिक आयु के कुल 11.78 लाख मतदाता, 100 वर्ष से अधिक आयु के कुल 17 हजार 241 मतदाता हो गए हैं.


युवा और महिला मतदाता नई सरकार बनाने में रहेगी निर्णायक भूमिका


इसी प्रकार से कुल 5.61 लाख विशेष योग्यजन मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं. केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा 80 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग मतदाताओं और 40 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांग मतदाताओं को निर्वाचन के समय होम वोटिंग के रूप में पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान की सुविधा का विकल्प भी दिया गया हैं. महिलाओं, ट्रांसजेंडरों, पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूहों) आदि वर्गों के पंजीकरण को बढ़ाने के लिये विशेष शिविरों का आयोजन कर इन्हें मतदाता सूची में जोड़ा गया.अंतिम प्रकाशन के बाद राज्य में कुल 606 ट्रांसजेंडर मतदाता हो गए हैं.


200 विधानसभा सीटों पर कुल मतदाताओं की संख्या- 5.26 करोड़
महिला मतदाताओं की संख्या- 2.51 करोड़


पुरूष मतदाताओं की संख्या- 2.73 करोड़
ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या--606


दिव्यांग मतदाताओं की संख्या- 5.61 लाख


80 साल से ज्यादा उम्र के मतदाताओं की संख्या- 11.78 लाख


100 साल से ज्यादा उम्र के मतदाताओं की संख्या-17 हजार 241


फर्स्ट टाइम वोटर्स की संख्या (18 से 19साल)--22.04 लाख


सर्विस वोटर्स की संख्या- 1.41 लाख मतदाता


मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रेसवार्ता में बताया की 200 विधानसभा क्षेत्रों में इस बार युवा वोटर्स की संख्या 2.73 करोड़ के करीब है. इन वोटर्स की उम्र 18 से लेकर 39 साल है. इसमें से 22 लाख 4 हजार से ज्यादा ऐसे वोटर्स है जो पहली बार वोट देंगे, जिनकी उम्र 18 से 19 साल के बीच है. वहीं 20 से 29 साल की उम्र के वोटर्स की संख्या 1.32 करोड़ और 30 से 39 साल के एजग्रुप के वोटर्स की संख्या 11.85 करोड़ है. पहली बार ऐसा हुआ है जब सहरिया जनजाति के सभी योग्य मतदाता (18 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोग) मतदाता सूची से जोडे़ गए है.


राज्य में सहरिया जनजाति के लोगों की संख्या 1.18 लाख है. इनमें से 18 साल या उससे ज्यादा की एजग्रुप के 77 हजार 343 लोग है. इन सभी 77 हजार 343 लोगों का नाम इस बार मतदाता सूची में जोड़ा गया है. पिछले 5 साल के अंदर (2018 विधानसभा चुनाव) से अब तक 48.91 लाख वोटर्स की संख्या में इजाफा हुआ हैं.


इस बार पुरूष वोटर्स की संख्या 23 लाख 96 हजार 629 बढ़ी है. जबकि 23 लाख 51,682 महिला वोटर्स बढ़ी है. वहीं इस बार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना में राज्य के 22 जिलों की 13232 से ज्यादा सेक्स वर्कर्स आगामी विधानसभा चुनाव में पहली बार वोट कर सकेंगी. इसमें सबसे ज्यादा जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बूंदी, नागौर, अलवर, जैसलमेर जिले में हैं.


युवा मतदाता पर सभी दलों की नजर


सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना में पहली बार इको आइडेंटिफाइ कर मतदाता सूची में रजिस्ट्रेशन कर फोटो पहचान पत्र उपलब्ध करवाए गए हैं. उन्होंने बताया की अब तक जिन मतदाताओं ने वोटर लिस्ट में नाम नहीं जुड़वाया है. वह इसकी वजह बताकर आचार संहिता के लागू होने के 10 दिन बाद तक नाम जुड़वा सकेंगे. इसे पूरक वोटर लिस्ट के नाम से नामांकन वापिसी के दिन प्रकाशित किया जाएगा. पूरक वोटर लिस्ट वाले मतदाता भी वोटिंग कर सकेंगे.


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बहरहाल, वोटर लिस्ट में शामिल हुए युवाओं पर सभी दलों की नजर है. सब जानते है कि ये वर्ग चुनावों की दिशा तय करने की कूवत रखता है. जाहिर युवाओं का मुद्दा पारंपरिक मतदाताओं से अलग होगा. यह तबका शिक्षा, विकास तथा आधुनिकता का महत्व समझता है और वह चुनावों में अपनी इसी समझ का इस्तेमाल करेगा. राजनीति दल भी इस बात को बखूबी समझ रहे हैं. युवाओं को अपने पक्ष में करना उनकी राजनीतिक मजबूरी भी है. ऐसे में ये जिसकी ओर मुड़ेंगे बाजी उसी के हाथ लगेगी.