Jaipur News : कहने को तो दवा की जरूरत बीमारी को कम करने के लिए होती है, लेकिन दवा मिलने के बाद भी मर्ज बढ़ता रहे तो होने वाली भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है. हम बात कर रहे हैं प्रदेश में बाल यौन अपराधों की रोकथाम के लिए बनाए गए पॉक्सो अधिनियम, 2012 की. इस कानून को लागू करने का उद्देश्य बाल अपराधों के अभियुक्तों को दंडित करना और बच्चों के प्रति लैंगिक अपराधों में कमी लाना था, लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो कानून लागू होने के साल- दर- साल बच्चों के खिलाफ यौन अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं. इस कानून के तहत अब 12 साल से कम उम्र की बच्चे के साथ दुष्कर्म करने वाले अपराधियों को फांसी की सजा देने का प्रावधान किया गया है. बीती एक जनवरी तक प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में पॉक्सो एक्ट के जहां 10202 मुकदमें लंबित हैं. वहीं हाईकोर्ट में इस एक्ट के 4230 से बढ़ते हुए वर्ष 2021 के मुकाबले मुकदमें न्याय का इंतजार कर रहे हैं.


दोगुना बढ़ रहे मामले


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पॉक्सो अदालतों में हर साल मुकदमें करीब दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं. 2019 ही ऐसा साल रहा जब यह संख्या 1025 से 1482 हुई, जबकि हर साल इनकी संख्या करीब दो गुणा बढ़ी. हालांकि इस दौरान 2018 में यह संख्या करीब ढाई गुणा बढ़कर 438 से बढ़कर 1025 हो गई. इसी तरह हाईकोर्ट में भी हर साल पॉक्सो मुकदमों की संख्या में बढ़ोतरी नजर आई. इस दौरान वर्ष 2020 में यह मुकदमों की संख्या में कमी होते हुए वर्ष 2019 के मुकाबले यह 707 से घटकर 416 रह गए, लेकिन 2022 में इन मुकदमों की संख्या तेजी 555 से बढ़कर 1242 हो गई.


यूं बढ़ता गया आंकड़ा 


 साल                      पॉक्सो कोर्ट      हाईकोर्ट


2012                         05                  00


2013                         12                  00
2014                         31                  65


2015                         68                 192
2016                         138               317


2017                         209               373
2018                         438               363


2019                        1025             707
2020                         1482            416


2021                         2753            555
2022                         4041           1242


कुल                         10202            4230


राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने कहा कि कुंठाग्रस्त अपराधियों के लिए बच्चे आसान शिकार होते हैं. इसके चलते इन अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है. इनकी बढ़ती संख्या को रोकने के लिए मुकदमों का तेजी के साथ निस्तारण करना होगा. इसके लिए नई अदालतें खोलने की भी जरूरत है.


Reporter- Mahesh Pareek


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