Sindhu Darshan 2024 : सिन्धु दर्शन यात्रा समिति की केन्द्रीय आयोजन समिति के राष्ट्रीय सदस्य वासुदेव देवनानी ने सोमवार को यहां विधानसभा में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को एक पत्र सौंपकर सिन्धु दर्शन तीर्थ यात्रियों के लिए राजस्थान सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान किये जाने का आग्रह किया है.


COMMERCIAL BREAK
SCROLL TO CONTINUE READING

समिति के राष्ट्री्य महामंत्री दिलबाग सिंह जसरोटिया और जयपुर अध्यक्ष मुकेश लखियानी भी इस मौके पर मौजूद थे. देवनानी ने मुख्यमंत्री से सिन्धु दर्शन तीर्थ यात्रियों के लिए अन्य राज्यों की तरह 25 हज़ार रुपए प्रति व्यक्ति को अनुदान दिये जाने का आग्रह किया.


देवनानी कहा कि इस यात्रा का आयोजन सन 1997 से लगातार किया जा रहा है. भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने इस यात्रा को शुरू किया था. राजस्थान प्रदेश से हर साल इस यात्रा में लगभग 500 से 1000 तक तीर्थ यात्री शामिल होते है.


समिति के राष्ट्रीय सदस्य देवनानी ने मुख्यमंत्री भजनलाल को बताया कि सिन्धु दर्शन तीर्थ यात्रा लेह लद्दाख से लेकर देश के अन्य हिस्सों में राष्ट्रीय एकता और समरसता को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण यात्रा है. लेह-लद्दाख में सिंधु दर्शन महोत्सव पिछले 27 वर्षों से नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है और इस वर्ष 28वीं सिंधु दर्शन यात्रा 23 जून से 26 जून तक चलेगी.


इस यात्रा का उद्देश्य प्राचीन सिंधु घाटी की हमारी समृद्ध विरासत के बारे में जन जागरूकता लाना है. यह यात्रा पवित्र सिन्धु नदी से गुजरती है। इस नदी के तट पर वेद लिखे गये. यात्रा का मार्ग संवेदनशील सीमा क्षेत्र है। लेह-लद्दाख का देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपना महत्व है. इस यात्रा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसी प्रख्यात हस्तियां शामिल हुई हैं. यात्रा में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्रीगण सहित जनप्रतिनिधिगण भी शामिल होते है.


देवनानी ने बताया कि यह यात्रा विश्व बन्धुत्वम को बढाने वाली तीर्थ यात्रा है. भारत के विभिन्न राज्यों के लोगों के साथ-साथ विश्व के अनेक देशों के लोग भी शामिल होते है. गत 27 वर्षों से समिति लगातार तीर्थ यात्रियों को दर्शन करा रही है.


इस बार 28वीं यात्रा रवाना होगी. देवनानी ने कहा कि देश के गुजरात, मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा सिन्धु दर्शन तीर्थ यात्रियों को सहायता उपलब्ध कराई जाती है. भारत में साम्प्रदायिक सौहार्द और एकता के प्रतीक के रूप में यह यात्रा जानी जाती है. यात्रा में बढी संख्या में विदेशी और देश के लोग शामिल होते है. यात्रा का मार्ग जम्मू् कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के राज्यों से होकर गुजरता है. यात्रा में 8-10 दिन का समय लगता है.