Jaipur: राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस सत्ता और संगठन के बीच टकराव के हालात बन गए हैं. नौबत यहां तक आ गई है कि मंत्री परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के सामने ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Doatasra) का वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल (Shanti Dhariwal) ने खुलकर विरोध कर दिया. दोनों नेताओं ने एक दूसरे को देख लेने की धमकी तक दे डाली.


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मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री से शिकायत करने के बाद प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा संगठन के कामकाज से दूरी बनाने वाले मंत्रियों की शिकायत सीधे सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से करेंगे. कहा जा रहा है कि आज शाम तक पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा इसकी रिपोर्ट सोनिया गांधी को भेजेंगे लेकिन यह पहला मामला नहीं है जब सत्ता और संगठन के बीच टकराव के हालात बने हो. 


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गहलोत सरकार के मंत्रियों ने संगठन के कामों से बनाई है दूरी 
दरअसल, पिछले काफी समय से संगठन के कार्यक्रमों से मंत्रियों की लगातार दूरी नजर आ रही है. प्रदेश कांग्रेस की ओर से हाल ही में जितने भी सोशल मीडिया कैंपेन चलाए जा रहे हैं, वो अखिल भारतीय कांग्रेस (Akhil Bharatiya Congress) की ओर से चलाए जा रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके गहलोत सरकार के मंत्रियों ने संगठन के कामों से दूरी बनाई हुई है. इतना ही नहीं, राष्ट्रीय कांग्रेस की आह्वान और मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी 8 मंत्रियों ने बनाई वैक्सीन अभियान से दूरी बनाई हुई है. 


आठ मंत्रियों ने फ्री वैक्सीनेशन अभियान से बनाई दूरी
सोशल मीडिया अभियान को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद आठ मंत्रियों ने फ्री वैक्सीनेशन सोशल मीडिया अभियान से दूरी बनाए रखी. न तो उन्होंने कोई ट्वीट किया और ना ही कोई वीडियो संदेश पोस्ट किया. जिन मंत्रियों ने दूरी बनाए रखी, उनमें कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद, परसादी लाल मीणा, लालचंद कटारिया, शांति धारीवाल, राज्यमंत्री अर्जुन बामणिया, भंवर सिंह भाटी, राजेंद्र यादव और महेंद्र चौधरी शामिल है.


महंगाई के खिलाफ शुरू किए गए अभियान में भी नहीं लिया हिस्सा
इससे पहले रविवार को भी महंगाई के खिलाफ शुरू किए गए सोशल मीडिया कैंपेन में 13 मंत्रियों ने अभियान से दूरी बनाई हुई थी, जिसके बाद से ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नाराज थे और उन्होंने मुख्यमंत्री को फोन पर मंत्रियों की शिकायत की थी. यही वचह है कि वैक्सीनेशन अभियान को लेकर मुख्यमंत्री ने सभी को इस अभियान से जुड़ने के निर्देश दिए थे. बावजूद इसके कई मंत्रियों ने वैक्सीनेशन अभियान से पूरी तरह दूरी बनाए रखी.


डोटासरा को लेकर मंत्रियों में असहयोग की मुहिम
दरअसल, संगठन के कामकाज को मंत्रियों की ओर से असहयोग की एक वजह यह भी है कि पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के कार्यकाल के दौरान कई कैबिनेट मंत्री पीसीसी चीफ बनने की दौड़ में शामिल थे लेकिन सियासी संकट के दौरान बदले हालातों के बीच कांग्रेस आलाकमान ने पीसीसी चीफ के पद पर गोविंद सिंह डोटासरा की ताजपोशी कर दी, जिसके बाद अंदरखाने डोटासरा को लेकर मंत्रियों में असहयोग की मुहिम चल पड़ी है. यही वजह है कि गहलोत सरकार के अधिकांश मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को पीसीसी अध्यक्ष के तौर पर पचा नहीं पा रहे हैं, और अध्यक्ष के तौर पर डोटासरा को असफल घोषित करने के प्रयास में जुटे हुए हैं. 


एक-दूसरे की बात का ऐसे दिया गया जवाब
मंत्री परिषद की बैठक में भी डोटासरा की यह पीड़ा साफ तौर पर नजर आई. डो़टासरा ने मंत्रियों की ओर इशारा करते हुए कहा था कि जब तक मैं प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष हूं तब तक मेरी बात को मानना पड़ेगा तो वहीं धारीवाल ने यहां तक कह दिया था कि कई अध्यक्ष आए और चले गए, किसी की बात मानने के लिए बाध्य नहीं हैं. दोनों के बीच बैठक में काफ देर तक तू-तू, मैं-मैं होती रही इसके बाद डोटासरा बैठक छोड़कर जाने लगे तो मुख्यमंत्री ने उन्हें वापस बुलाया है. डोटासरा इस बात से भी नाराज थे कि मुख्यमंत्री के समक्ष ही एक वरिष्ठ मंत्री पीसीसी चीफ को ही देख लेने की धमकी दे रहे हैं.