Bamanwas: उपखंड मुख्यालय बौंली पर झमाझम बारिश का सकारात्मक असर देखने को मिला है. वर्ष 2022 में हुई 631 एमएम बारिश के बाद उपखंड क्षेत्र और समीपस्थ क्षेत्र के पर्यटन और सिंचाई का मुख्य स्रोत कहे जाने वाले ढील बांध पर पानी की बंपर आवक हुई है.


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वर्तमान में ढील बांध पर 1 फीट से अधिक की चादर चलने लगी है. चादर चलने के साथ ही बांध पर पर्यटकों का सैलाब उमड़ने लगा है. गौरतलब है कि जयपुर के तत्कालीन शासक सवाई माधोसिंह द्वितीय ने सन् 1911 में इस बांध का निर्माण करवाया था. करीब 250 वर्ग मील जल भराव क्षेत्र वाले से बांध की क्षमता 1215 मिलियन क्यूबिक फीट है. बांध से करीब 29 मील तक नहरें बनी हैं और आसपास के सैकड़ों गांव के लिए सिंचाई के प्रमुख स्रोत का काम करती हैं.


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बांध की बनावट और प्राकृतिक आभामंडल पर्यटकों को आकर्षित करता है. ऐसे में बांध ओवरफ्लो होने के बाद हजारों की तादाद में यहां सैलानी आते हैं. उपखंड मुख्यालय के पर्यटकों के लिए पिकनिक का मुख्य स्रोत माने जाने वाले बांध पर चादर चलने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है. वहीं बांध भरने से स्थानीय धरती पुत्रों के चेहरे भी खिल उठे हैं हालांकि बांध पर अधिक चादर चलने के बाद समीपस्थ क्षेत्र में बाजरे और तिल की फसलों को भारी नुकसान होने की भी संभावनाएं हैं. बांध पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर माकूल व्यवस्थाएं न होना भी आश्चर्यजनक है.


दरअसल बांध की दीवार की ऊंचाई 50 फीट से अधिक है. वहीं, बांध के ठीक बाहर बनी हुई दीवार पर रेलिंग टूटी हुई है, जिस पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है. तेज ओवरफ्लो के चलते टूटी रेलिंग के कारण हादसे की भी संभावना बनी रहती है. स्थानीय लोगों द्वारा पूर्व में कई बार प्रशासन से रेलिंग को दुरुस्त करवाने की मांग की जा चुकी है लेकिन मामला जस का तस बना हुआ है.


Reporter- Arvind Chauhan


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