लखनऊ। कवि कुमार विश्वास यूपी विधान परिषद का सदस्य नहीं बनना चाहते हैं. बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर कुमार विश्वास ने ठुकरा दिया है. विधान परिषद में मनोनीत कोटे की छह सीटों में लेखक, कवि, सांस्कृतिक कलाकार सहित अन्य क्षेत्र से लोगों को मनोनीत करने का प्रावधान है. लेकिन 26 मई 2022 से इन सीटों पर मनोनयन अटका है. सूत्रों के मुताबिक कुमार विश्वास को एमएलसी नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन वे प्रदेश की राजनीति नहीं करना चाहते हैं. उनकी दिलचस्पी राष्ट्रीय राजनीति में है. लिहाजा उन्होंने एमएलसी बनने का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया है. भाजपा में उनके कुछ करीबी मित्र उन्हें मनाने का प्रयास भी कर रहे हैं.


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सीएम पर किताब लिखने वाले लेखक भी रेस में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर द मांक हू बिकेम चीफ मिनिस्टर, द मांक हू ट्रांसफार्म उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी पास्ट, प्रजेंट एंड फ्यूचर के लेखक शांतुनू गुप्ता का नाम भी एमएलसी के पैनल में है. पीएम मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा के बेटे साकेत मिश्रा का नाम भी पैनल में है. ग्रेजुएट साकेत ने आईपीएस की नौकरी छोड़कर बैंक की नौकरी शुरू की थी. साकेत को पहले लोकसभा चुनाव लड़ाने की चर्चा भी रही है. 


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मालिनी अवस्थी समेत कई नाम
एमएलसी के लिए लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी का नाम भी पैनल में है. राजनीतिक क्षेत्र से भाजपा के कानपुर- बुंदलेखंड क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, बृज के क्षेत्रीय अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी का नाम भी शामिल हैं. मनोनीत कोटे से एक दलित, एक महिला और एक पिछड़े वर्ग के नेता की नियुक्ति की जाएगी. पार्टी आगामी आम चुनाव के मद्देनजर जातीय संतुलन बैठाने के लिए मंथन कर रही है. कुछ नामों पर सहमति नहीं बनने से परिषद में सदस्यों का मनोनयन नहीं हो पा रहा है.


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