सोनभद्र: अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर दिए गए बयान को लेकर उन पर धार्मिक भावनाएं भड़काने और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है. जिसमें पूर्व मंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को आधार बनाया गया है. 


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मौर्य के खिलाफ सोनभद्र के मांची थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है. मौर्य ने पोस्ट में आदिवासियों, घुमंतू जनजातियों, ग्राम समाज की जमीन पर बसे दलितों, पिछड़ों, गरीबों, वंचितों, अल्पसंख्यकों को नागरिकता से वंचित करने की बात कही थी.  साथ ही केंद्र सरकार को आदिवासी, दलित, पिछड़ा, गरीब, अल्पसंख्यकों का विरोधी बताया था. 


क्या लिखा था पोस्ट में?
मौर्या ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "नागरिकता संसोधन विधेयक (CAA) क़ानून लागू करना केंद्र सरकार का जन विरोधी निर्णय है, जो आदिवासी, दलित, पिछड़ा, गरीब, अल्पसंख्यक विरोधी भी है. सैकड़ों वर्षों से जंगलों में रहने वाले आदिवासियों तथा घूमन्तु जनजातियों, ग्राम समाज की जमीन पर बसे दलितों, पिछड़ो, गरीबों, वंचितों, अल्पसंख्यको के पास आज भी राजस्व अभिलेख उपलब्ध नहीं है, इस कानून के माध्यम से ऐसे करोड़ों लोगों को प्रताड़ित करने व कब्जे से बेदखल कर नागरिकता से वंचित करने का घिनौनी साजिश है. इस जन विरोधी क़ानून की मैं घोर निंदा करता हूं."



गौरतलब है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं. हाल ही में उन्होंने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दिया था. इसके बाद उन्होंने अपनी नए दल राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के पुनर्गठन किया था.जानकारी के मुताबिक, अलीगढ़ के रहने वाले साहेब सिंह धनगर ने 2013 में यह बनाई थी.


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