UP Rajya Sabha Chunav 2024: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीट पर खड़े 11 उम्मीदवारों के चुनाव में सियासी तस्वीर मंगलवार सुबह ही साफ हो गई. बीजेपी ने अपने संख्याबल से बाहर जाकर संजय सेठ को आठवें प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा था. सुबह चुनावी गहमागहमी शुरू होते ही सपा के एक-एक कर विधायक बीजेपी के खेमे में जाने लगे. दोपहर होते-होते सपा के कम से कम आठ विधायकों ने बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया. सपा को इतने बड़े पैमाने पर बगावत की भनक भी नहीं लगी. इसके पीछे भाजपा की सधी रणनीति को माना जा रहा है.


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राज्यसभा चुनाव में सपा का अंकगणित बिगड़ने के पीछे कई कारण सामने आते हैं. इसकी शुरुआत सिराथू से सपा विधायक पल्लवी पटेल के बयान से होती है. उन्होंने सपा द्वारा घोषित उम्मीदवार (जया बच्चन, आलोक रंजन, रामजीलाल सुमन) को लेकर सवाल खड़ा किया. साथ ही राज्यसभा चुनाव में वोट न देने की बात कही. इसके अलावा स्वामी प्रसाद मौर्य, सलीम शेरवानी समेत कई नेताओं की नाराजगी से भी माहौल बना. 


सियासी हवा का रुख तब और पलट गया जब जयंत चौधरी पाला बदलकर बीजेपी के साथ चले गए. इसके बाद सपा के सामने न केवल तीसरी सीट के अंक गणित को साधने की चुनौती थी बल्कि विधायकों को टूटने से भी बचाना था. हालांकि सपा की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश की गई. विधायकों को डिनर पर बुलाकर सब कुछ ठीक करने की कोशिश की गई लेकिन बैठक में करीब 8 विधायक शामिल नहीं हुए. इसके बाद राज भैया को पाले में लाने का दांव भी नहीं चला. शायद राजा भैया अखिलेश से वो सियासी अदावत को भुला नहीं पाए, जिसमें उन्होंने पत्रकारों के सवाल पर कहा था- कौन राजा भैया, मैं तो नहीं जानता किसी राजा भैया को. राजा भैया ने न केवल अपने जनसत्ता दल के विधायकों का समर्थन दिया, बल्कि माना जा रहा है कि अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह और गोसाईंगंज सीट अभय सिंह को भी बीजेपी के पाले में लाने में अहम भूमिका निभाई.


 


दयाशंकर सिंह से लेकर राजभर हुए एक्टिव
संख्या बल न होने के बाद भी राज्यसभा चुनाव में बीजेपी की 8वें प्रत्याशी को उतारने के पीछे की वजह सपा में संभावित बिखराव को माना गया. इसके लिए बीजेपी के साथ उसके सहयोगी दल भी एक्टिव हो गए. दयाशंकर सिंह, ओपी राजभर, संजय निषाद से लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मोर्चा संभालते हुए सपा विधायकों को पाले में लाने के लिए जुट गए. सपा को तब झटका लगा जब गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने एनडीए उम्मीदवार संजय सेठ को वोट देने का ऐलान कर सियासी पारा बढ़ा दिया. 


इसका अलावा 8वें प्रत्याशी के तौर पर उतरे संजय सेठ इससे पहले सपा से राज्यसभा जा चुके हैं. कहा जाता है कि उनके बीजेपी में शामिल होने के बाद भी कई सपा नेताओं से कनेक्शन बरकरार हैं. 


डिप्टी सीएम संग  सपा के 8 बागी विधायकों ने डाला वोट
समाजवादी पार्टी के 8 बागी विधायकों को मतदान कराने के लिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक अपने साथ लेकर गए. सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह, राकेश पांडे, अभय सिंह, मनोज पांडे, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी, महराजी प्रजापति और आशुतोष मौर्य ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया है.


अखिलेश बोले राज्यसभा की तीसरी सीट परीक्षा थी
वोटिंग के दौरान क्रॉस वोटिंग से सपा प्रमुख को भी तीसरी सीट हाथ से निकलने के संकेत मिल गए. सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा, "हमारी राज्यसभा की तीसरी सीट की परीक्षा थी, सच्चे साथियों की पहचान करने की परीक्षा थी. ये जानने की कौन-कौन दिल से PDA के साथ है, कौन अंतरात्मा से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के खिलाफ है, अब सब कुछ साफ है, यही तीसरी सीट की जीत है."


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