बस्‍ती : ग्राम प्रधान महिलाओं को कम आंकने वाले पति जरा सावधान हो जाएं. अब महिला ग्राम प्रधान अपने अधिकारों को लेकर सजग हो रही हैं. इसका ताजा उदाहरण बस्‍ती जनपद में देखने को मिला है. यहां महिला ग्राम प्रधान ने अपने ही पति के खिलाफ भ्रष्‍टाचार को लेकर शिकायत दर्ज कराई है. मामले में मुख्‍य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने जांच के आदेश दिए हैं. भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त प्रधान पति पर मुकदमा दर्ज होने का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. 


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गिरफ्तारी के लिए लगा रही चक्‍कर 
दरअसल, हर्रया ब्‍लॉक के सरैया तिवारी गांव निवासी महेश कुमार शिक्षक है. महेश की पत्‍नी अर्चना ग्राम प्रधान हैं. अर्चना ने सीएम योगी और जनपद के सीडीओ राजेश प्रजापति को पत्र लिखकर अपने ही पति महेश कुमार पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाए हैं. ग्राम प्रधान अर्चना का आरोप है कि जनता ने उन्हें प्रधान चुना है, लेकिन उनका पति महेश कुमार उनको रबर स्‍टांप की तरह प्रयोग कर रहा है. महिला ग्राम प्रधान अपने पति को जेल भिजवाने के लिए अधिकारियों के दफ्तर का चक्‍कर लगा रही है. 


अधिकारियों की मिलीभगत से बंदर बांट  
आरोप है कि महेश कुमार ने ग्राम पंचायतों से संबंधित सभी कागज, चेक बुक को अपने पास रख कर फर्जी हस्‍ताक्षर कर ग्राम विकास के कार्यों में भ्रष्‍टाचार कर रहा है. ग्राम विकास के किसी भी काम में प्रधान की राय नहीं ली जाती. ग्राम विकास अधिकारी की मिलीभगत से फर्जी स्‍टांप और हस्‍ताक्षर से ग्राम विकास निधि का पैसा निकाल कर बंदर बांट किया जा रहा है. अर्चना ने सीएम और जिले के आला अधिकारियों से ग्राम प्रधान का अधिकार दिलाने की मांग की है. 
  
अभी तक प्रधान पति की गिरफ्तारी नहीं 
खास बात यह है कि गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी प्रधान पति की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है. प्रधान पति अपनी पत्नी को लगातार मुकदमा वापस लेने की धमकी दे रहा है. महिला ग्राम प्रधान अपने पति के डर से किसी अज्ञात जगह पर छिपी है. स्‍थानीय लोगों का कहना है कि अर्चना ने भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जो आवाज उठाई है वह अन्‍य महिला ग्राम प्रधानों के लिए नजीर होगी. बता दें कि अर्चना की शिकायत के आधार पर एसपी आशीष श्रीवास्‍तव ने महेश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई. 


सीडीओ ने जांच टीम गठित की 
सीडीओ राजेश प्रजापति ने बताया कि महिला ग्राम प्रधान अर्चना 9 नवंबर को उनके पास आई थीं. मामले में एक जांच कमेटी बना दी गई है. साथ ही अर्चना का पति शिक्षक है, इसलिए बीएसए को भी मामले से अवगत कराया गया है और जांच करने को कहा गया है. उन्‍होंने कहा कि किसी भी प्रधान पति द्वारा ऐसा किया जाना गलत है, दोषी को बख्‍शा नहीं जाएगा. उन्‍होंने कहा कि अर्चना ने यह साबित कर दिखाया है कि महिलाएं न तो कमजोर हैं न ही अबला, महिलाएं अपने अधिकारों के लिए न सिर्फ लड़ना जानती हैं बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने पति के खिलाफ भी खड़ी हो सकती हैं. 


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