National Commission for Men: विवाहित पुरुषों के घरेलू हिंसा के शिकार होने का मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर राष्ट्रीय महिला आयोग की तर्ज पर देश में पुरुषों के लिए भी राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग की गई है.


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राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग
याचिका में कहा गया है कि महिलाओं पर घरेलू हिंसा होने पर उन्‍हें न्‍याय मिल जाता है. हालांकि जब पुरुषों पर घरेलू हिंसा की जाती है तो उन्‍हें इंसाफ नहीं मिल पाता. यही वजह है पुरुषों के आत्‍महत्‍या करने के मामले बढ़ गए हैं. याचिका में राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग कर पुरुषों के आत्‍महत्‍या के मामले में कमी लाने की बात कही गई है. 


यह है याचिका का पक्ष 
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका अधिवक्ता महेश कुमार तिवारी ने दाखिल की है. महेश कुमार तिवारी ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी पेश किए हैं. इसमें बताया गया है कि साल 2021 की एनसीबी रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि पुरुष भी घरेलू हिंसा के शिकार होते हैं.  


पुरुषों में आत्‍महत्‍या करने के मामले बढ़े 
याचिका में दावा किया गया है कि देश में महिलाओं से ज्यादा पुरुष आत्‍महत्‍या कर रहे हैं. NCRB डाटा के हिसाब से साल 2021 में पूरे देश में सुसाइड यानी आत्महत्या के 1,64,033 मामले दर्ज किए गए. इनमें 1,18,979 मामले पुरुषों के और 45,026 मामले महिलाओं से जुड़े थे. 


आत्‍महत्‍या करने में विवाहित पुरुष ज्‍यादा 
अधिवक्ता तिवारी ने दावा किया है कि देश में आत्महत्या करने वाले पुरुषों में भी कुंआरों के मुकाबले विवाहितों की संख्या करीब 3 गुना ज्यादा है. डाटा के हिसाब से सुसाइड करने वाले 1,18,979 पुरुषों में 81,063 विवाहित थे, जबकि शेष पुरुष कुंआरे या विधुर थे. इसके उलट आत्महत्या करने वाली 45,026 महिलाओं में शादीशुदाओं की संख्या 28,689 थी. 


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