वाराणसी: वाराणसी में चातुर्मास व्रत महोत्सव के बाद अब अयोध्या में कारसेवकों की आत्मा की शांति के लिए कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती अनुष्ठान करेंगे. इस अनुष्ठान के लिए शंकराचार्य 10 अक्तूबर को अयोध्या पहुंचेंगे और वहां पर 20 दिन रहेंगे. अयोध्या में जो भी कारसेवकों जान गई थी उनकी आत्मा की शांति के लिए शंकराचार्य सरयू के तट पर चतुर्दशी तिथि को उनके लिए शांति अनुष्ठान करेंगे. इस पूरे अनुष्ठान को शंकराचार्य के मार्गदर्शन में संपन्न किया जाएगा. 


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अयोध्या में भी श्रद्धांजलि 
वहीं आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को अयोध्या में मंदिर ट्रस्ट की तरफ से श्रद्धांजलि दी जाएगी. फिलहाल, राम मंदिर निर्माण का काम तेजी से जारी है और अगले साल जनवरी महीने में भव्य कार्यक्रम में प्राण प्रतिष्ठा भी करा दिया जाएगा. लेकिन उससे पहले मंदिर के लिए जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी जाएगी. ट्रस्ट ने इस फैसले की जानकारी गी है और इस संबंध में कहा है कि इस पितृ पक्ष में सरयू नदी के तट पर 11 दिन का अनुष्ठान होगा जो कि मंगलवार से शुरू किया जाएक एक पखवाड़े तक चलने वाले इस पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध किया जाता है. 


10 हजार परिवार होंगे शामिल 
जानकारी है कि अयोध्या में होने वाला ये अनुष्ठान नवाह पारायण पथ के साथ  करीब 10 हजार परिवारों द्वारा शुरू किया जाएगा. जहां नौ दिन में संपूर्ण रामचरितमानस का पाठ किया जाएगा और 11 अक्टूबर को समाप्त कर दिया जाएगा. इसमें अयोध्या के करीब 10,000 परिवारों को शामिल किया गया है जिनको 9 दिन में संपूर्ण रामचरितमानस का पाठ करना होगा. आयोजन के अंतिम दिन यानी 13 अक्टूबर को राम मंदिर आंदोलन में जान गंवा चुके लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी. इसके लिए सरयू नदी के तट पर ट्रस्ट के द्वारा राम की पैड़ी पर मिट्टी के बने 10,000 दीपक जलाए जाएंगे.


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