तेरे शहर का मौसम सुहाना है... बारिश की रोमांटिक शायरी को दिल को तरबतर कर देगी

बारिश का साया

दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था, इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था आपको देखकर वो बरसा ऐसा, इस कदर दिल मेरा कभी शरमाया न था

बारिश की तासीर

बारिश से ज्यादा तासीर है तेरी यादों मे हम अक्सर बंद कमरे मे भी भीग जाते हैं

रोमांटिक शाम

आज की शाम गुजारेंगे हम तेरी यादों की बारिश में, तरबतर होने में बेफिक्र सड़क पर आया हूं

यादों की बारिश

कहीं फिसल न जाऊं, तेरे ख्यालों में चलते चलते अपनी यादों को रोक लो, मेरे शहर में बारिश हो रही है

शहर का मौसम

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूं अगर बुरा न लगे

गीले गेसू

मत झटका करो गीले गेसुओं से पानी की वो बूंदे, ये कम्बखत बादल भी बरसने से इनकार कर देता है

फलक से बूंदें

गुनगुनाती हुई आती हैं फलक से बूंदें लगता है तेरी पाजेब बादल से टकराई है

यादों का समंदर

आंखों में समेटे हूं तेरी यादों का समंदर ऐ बादल तू इस बार इतना मत बरस

महफिलों की खुशबू

सारी महफिलों की रौनक आज मंद पड़ गई, बारिश की बूंदे तेरे चेहरे पर जो आज चंद पड़ गईं

भीगी जुल्फें

कम से कम अपनी जुल्फें तो संभालकर निकला करो, कमबख्त, झटकती हो तो बेवजह मौसम बदल जाता है

सुहाना मौसम

सुहाने मौसम में दिल कहीं भटक जाता है, उस गली में जाते ही फिर से दिल अटक जाता है

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