-नरेन्द्र मोदी, इज़रायल का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं. 


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-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ये दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत और इज़रायल के कूटनीतिक रिश्तों के 25 वर्ष हो गए हैं. 


-नरेन्द्र मोदी की य़ात्रा के दौरान इज़रायली प्रधानमंत्री पूरे वक्त उनके साथ रहेंगे।


-ऐसा कहा जाता है कि इज़रायल के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने हमेशा अच्छे रिश्ते रखे। 


-पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ज़माने में भी इज़रायल के राष्ट्रपति एरियल शैरोन भारत की यात्रा करने वाले पहले इज़रायली राष्ट्रपति बने थे। 


-कांग्रेस की सरकारों पर ये आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने इज़रायल को हमेशा नज़रअंदाज़ किया। 


-हालांकि PV नरसिम्हा राव के कार्यकाल में इज़रायल के साथ भारत के कूटनीतिक रिश्तों की शुरुआत हुई थी।


-अपनी 48 घंटे की यात्रा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुल 18 कार्यक्रम हैं। 


-इस दौरान दोनों देशों के बीच एक द्विपक्षीय वार्ता होगी, इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी-इज़रायल में भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे।


-इसके अलावा नरेंद्र मोदी की मुलाक़ात इज़रायल की कंपनियों के CEOs से होगी.


-पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, इज़रायल के प्रधानमंत्री नेतनयाहू के साथ आतंकवाद के मुद्दे पर क्या बातचीत करेंगे? 


-भारत और इज़रायल दोनों को अंग्रेज़ों से एक ही दौर में आज़ादी मिली। भारत 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ, जबकि इज़रायल को 14 मई 1948 को आज़ादी मिली।


-दोनों देशों में ऐसी राजनीतिक पार्टियां हैं, जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 


-और मौजूदा हालात में दोनों देशों में राष्ट्रवादी विचारधारा वाली पार्टियों की सरकारें हैं। 


-दोनों देशों में मुसलमानों की भी अच्छी खासी संख्या है। इज़रायल की जनसंख्या में करीब 18% मुस्लिम हैं। जबकि भारत में करीब 14 प्रतिशत मुसलमान हैं।


-इज़रायल के पास दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी है, जिसका नाम है मोसाद। 


-मोसाद को इज़रायल की किलिंग मशीन कहा जाता है। मोसाद अपने दुश्मनों को दुनिया के किसी भी कोने में मारने की क्षमता रखता है। 


-इज़रायल पूरी दुनिया में अपने अविष्कारों के लिए मशहूर है। वहां के Start-up Business पूरी दुनिया को चुनौती दे रहे हैं। इज़रायल में कम से कम 6 हज़ार Startups हैं। 


-इज़रायल दुनिया के सबसे छोटे देशों में से एक है। जो चारों तरफ से अपने दुश्मन देशों से घिरा हुआ है। दुश्मन भी ऐसे, जो इज़रायल को किसी भी तरीके से ख़त्म कर देना चाहते हैं। 


-इसके बावजूद इज़रायल का हर दुश्मन उससे घबराता है। क्योंकि उसने खुद को सुरक्षा के लिहाज़ से अभेद बना लिया है और उसके पास हथियार और हिम्मत की कोई कमी नहीं है।


-इसके अलावा इज़रायल अपने पानी के संरक्षण और खेती के नये-नये तरीकों के लिए भी जाना जाता है। 


-5 सितंबर 1972 को जर्मनी के म्यूनिख शहर में Olympic Games के दौरान फिलस्तीन के आतंकवादियों ने इज़रायल के 11 खिलाड़ियों को बंधक बना लिया था। 


-उस वक्त आतंकवादियों ने मांग रखी थी, कि इज़रायल की जेलों में बंद 234 फिलस्तीनियों को रिहा किया जाए, लेकिन इज़रायल ने दो टूक शब्दों में उनकी मांग मानने से इंकार कर दिया था। जिसके बाद इज़राएल के खिलाड़ियों की हत्या कर दी गई।


-बाद में जवाबी कार्रवाई में इस हमले को अंजाम देने वाले 8 आतंकवादी मार दिए गए।


-इसके बाद इज़राएल ने अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद से उन सभी लोगों के कत्ल की योजना बनाई, जिन्होंने इस हमले की साज़िश रची थी।


-इस मिशन को Operation Wrath of God यानी ईश्वर का कहर कहा गया था।


-मोसाद के एजेंट्स दुनिया के अलग-अलग देशों में जाकर करीब 20 साल तक गुनहगहारों को उनके अंजाम तक पहुंचाते रहे। और वो तब तक नहीं रुके, जब तक एक-एक आतंकवादी मारा नहीं गया।