Earth's Lowest Temperature: इंसान की पांच मुख्य इंद्रियां - स्पर्श, दृष्टि, गंध, आवाज और स्वाद तो सब जानते ही हैं. लेकिन इनके अलावा भी ऐसी कई चीजें हैं, जिन्हें इंसान महसूस कर सकता है. इनमें से एक बहुत जरूरी चीज है गर्मी-ठंड का अहसास. वैज्ञानिक इस गर्मी-ठंड को नापने के लिए कई तरीके इस्तेमाल करते हैं, जिनमें से सबसे ज़्यादा मशहूर है सेल्सियस. आपने सुना होगा कि धरती पर बहुत गर्मी पड़ सकती है, लेकिन ये जानकर जरूर हैरान होंगे कि धरती की सबसे कम -274 डिग्री सेल्सियस तक हो सकती है. Quora पर उन दिलचस्प सवालों का जवाब जानने से पहले ये समझ लीजिए कि ये "गर्मी-ठंड" नापने वाला वाला पैमाना आखिर काम कैसे करता है.


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किस हद तक गिर सकता है तापमान


दरअसल, "गर्मी-ठंड" यानी कि तापमान, वो ऊर्जा है जो किसी चीज के छोटे-छोटे कणों यानी अणुओं को हिलने-डुलने का जरिया देती है. जितनी ज़्यादा ऊर्जा, उतने ज़्यादा ये कण हिलते-डुलते हैं और आपस में ऊर्जा का लेन-देन करते हैं. लेकिन अब सोचिए, अगर सारी ऊर्जा खत्म हो जाए, तो क्या होगा? वैज्ञानिक कहते हैं कि ठीक ज़ीरो केल्विन पर, जो कि -274 डिग्री सेल्सियस के बराबर है, ये सारे कण जमकर आखिरी स्थिति में चले जाते हैं. कोई हलचल नहीं होती और न ही कोई वाइब्रेशन. मतलब कोई तापमान भी नहीं रह जाता. ये जीरो केल्विन सबसे कम तापमान है जिसे आज तक पाया गया है, और वैज्ञानिक इसे "absolute zero" यानी पूरी तरह से जमी हुई स्थिति कहते हैं. 


धरती पर सबसे ज़्यादा ठंड कितनी


धरती पर सबसे ज़्यादा ठंड कितनी जा सकती है, ये सोचने वाली बात ज़रूर है. दरअसल, ये सब चीज़ों के सबसे छोटे कणों, यानी अणुओं, की हरकत पर निर्भर करता है. जीरो केल्विन, यानी -274 डिग्री सेल्सियस, किसी भी जगह की सबसे कम संभावित तापमान है. ये इसलिए क्योंकि इस तापमान पर अणु बिल्कुल जमकर, बिना किसी हलचल के मौजूद होते हैं. मतलब किसी तरह की ऊर्जा का आदान-प्रदान नहीं होता, इसलिए तापमान का अस्तित्व ही खत्म हो जाता है. 


धरती पर सबसे ज़्यादा ठंड जो पाई जाती है वो ज़मीन की ऊपरी सतह से भी ऊपर, मेसोपॉज नाम की जगह पर है, और वो भी सिर्फ -100 डिग्री सेल्सियस. जमीन पर भी तो सबसे कम तापमान -98 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही पाया जाता है. मगर ये ध्यान रखिए, चाहे कितनी भी ज़्यादा जोर लगाओ, धरती या पूरे ब्रह्मांड में भी कभी -274 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ठंड नहीं हो सकती. बात ये है कि ज़्यादातर मात्राओं को तो आप जितना चाहे बढ़ा-घटा सकते हैं, जैसे कि लंबाई या दूरी. लेकिन तापमान का अपना एक खास नियम है, एक जरूरी सीमा, जिसे तोड़ना नामुमकिन है.