नई दिल्ली: वेद-शास्‍त्रों में ज्ञान की तमाम बातों के साथ-साथ रोजमर्रा की जिंदगी और आदतों को लेकर भी मार्गदर्शन दिया गया है. शास्‍त्रों के मुताबिक व्‍यक्ति का हर काम उसके जीवन पर असर डालता है. लिहाजा इन ग्रंथों में लोगों के खान-पान, रहन-सहन, आचार-व्यवहार जैसे कई पहलूओं पर बात की गई है. इनके मुताबिक शाम को कुछ कामों को वर्जित किया गया है. यदि लोग सूर्यास्‍त के समय यह काम करते हैं, तो इससे उन्‍हें आर्थिक हानि होती है. साथ ही उनकी सेहत पर भी नकारात्‍मक असर होता है. 


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- सूर्यास्‍त के समय कभी भोजन न करें. मनुसंह‌िता के मु‍ताबिक इस समय भोजन करने से व्‍यक्ति अगले जन्म में पशु योनी में जन्म म‌िलता है.


- वहीं शाम के समय बीमार लोगों और बच्चों के अलावा क‌िसी भी स्वस्‍थ व्यक्त‌ि को नहीं सोना चाह‌िए. शाम के समय सोने से देवी लक्ष्‍मी नाराज होती हैं. इसके अलावा व्यक्त‌ि बीमार भी होता है. 


- इसी तरह शाम के समय कभी क‌िसी को उधार नहीं देना चाह‌िए. कहते हैं इस समय धन देने से देवी लक्ष्मी रुष्‍ट होकर घर से चली जाती हैं.


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- इस समय का उपयोग ध्‍यान-साधना में करें. चूंकि सूर्यास्त द‌िन और रात का संध‌िकाल होता है लिहाजा इसे ध्यान और साधना का समय बताया गया है. इस समय भूलकर भी संबंध बनाने से बचना चाहिए क्‍योंकि इस समय हुए गर्भधारण से पैदा हुई संतान संस्कारी नहीं होती है और पर‌िवार की प्रतिष्‍ठा को चोट पहुंचाती है.


- सूर्यास्‍त के समय अध्‍ययन की बजाय ध्‍यान ही करें. शास्‍त्रों में संध्या के समय को वेद और शास्‍त्रों का अध्ययन करने से मना किया गया है. यह समय स‌िर्फ ध्यान और साधना ही करना चाहिए. 


(नोट: इस लेख में दी गई सूचनाएं सामान्य जानकारी और मान्यताओं पर आधारित हैं. Zee News इनकी पुष्टि नहीं करता है.)