Virender Sehwag Statement: टीम इंडिया के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा किया है. वीरेंद्र सहवाग का ये खुलासा हर किसी को हैरान करके रख देगा. वीरेंद्र सहवाग ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह टीम इंडिया में अपने पसंद के खिलाड़ियों को तरजीह देते थे और काफी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते थे. वीरेंद्र सहवाग ने ग्रेग चैपल पर ये आरोप भी लगाया कि उन्होंने कप्तानी के सपने दिखाकर उन्हें टीम इंडिया से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया. 


COMMERCIAL BREAK
SCROLL TO CONTINUE READING

कप्तान बनने के सपने दिखाकर टीम इंडिया से ही बाहर कर दिया


वीरेंद्र सहवाग ने स्पोर्ट्स नेक्स्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने आते ही सबसे पहले ये बात कही कि वीरेंद्र सहवाग टीम इंडिया के कप्तान बनेंगे. दो महीने बाद ऐसा हुआ कि कप्तानी तो भूल जाइए, मुझे टीम इंडिया से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. भारतीय कोच हो या फिर विदेशी कोच सभी के अपने-अपने फेवरेट खिलाड़ी होते थे. कुछ खिलाड़ियों को ये लगता था कि विदेशी कोच आएगा तो वह पक्षपात नहीं करेगा, लेकिन ऐसा नहीं था. विदेशी कोचों के भी अपने पसंदीदा खिलाड़ी होते हैं. विदेशी कोच भी नाम देखते है, चाहे तेंदुलकर हों, द्रविड़ हों, गांगुली हों या लक्ष्मण हों.' ग्रेग चैपल की अगर बात करें तो उनके कोचिंग का कार्यकाल काफी विवादों में रहा था. सौरव गांगुली के साथ उनके काफी विवाद की खबरें सामने आई थीं.


वीरू जैसा बल्लेबाज मिलना मुश्किल


आपको बता दें कि वीरेंद्र सहवाग ने 104 टेस्ट में 49.34 के औसत से 8586 रन बनाए जिसमें 23 शतक और 32 अर्धशतक शामिल रहे. उनका बेस्ट स्कोर 319 रहा है. वीरू ने 251 वनडे में 8273 रन बनाए जिसमें 15 शतक और 38 अर्धशतक शामिल है. इस फॉर्मेट में वीरू का बेस्ट स्कोर 219 है. इसके अलावा 19 टी-20 मैचों में वीरू ने 394 रन बनाए, जिसमें 68 रन उनका सर्वाधिक स्कोर रहा. वीरेंद्र सहवाग को दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों की पिटाई करके उनकी लाइन और लेंथ बिगाड़ने की आदत थी. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक से बढ़ कर एक बल्लेबाज आए और गए, लेकिन वीरू जैसा बल्लेबाज मिलना मुश्किल है. वीरेंद्र सहवाग मैच की पहली ही गेंद से विपक्षी टीम के गेंदबाजों पर आक्रमण करना शुरू कर देते थे. वीरू जब क्रीज पर उतरते थे तो वह विरोधी गेंदबाज के लिए खौफ बन जाते थे और गेंदबाज की जरा सी भी कमजोर गेंद को सीमा रेखा से पार भेजने से नहीं चूकते थे.