Plant Research: आप अगर मिट्टी की ऐसी गंध सुनें जो कि घास काटने के बाद हवा में भर जाती है तो यह पौधों की चीखों का शोर हो सकता है. जी हां जानवरों की तरह, पौधे भी आस-पास के पड़ोसियों को चेतावनी दे सकते हैं कि खतरा आने वाला है.


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हलांकि पौधे कम्युनिकेशन के लिए ध्वनि का इस्तेमाल नहीं करते हैं. वे केमिकल का उपयोग करते हैं जिन्हें वे हवा के जरिए ट्रांसमिट करते हैं, जिससे हमें ताज़ी कटी घास जैसी गंध आती है. पहली बार वैज्ञानिकों ने इस दिलचस्प बातचीत को कैमरे में कैद किया है.


वैज्ञानिकों ने की रिकॉर्डिंग
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने एक विशेष माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल करके रिकॉर्ड किया कि स्वस्थ पौधों को जब क्षतिग्रस्त पौधों से चेतावनी मैसेज मिले, तो वे एक प्रकाश बल्ब की तरह जल उठे. प्रकाश के रूप में किसी केमिकल का संकेत मिलता है.


सैतामा यूनिवर्सिटी के मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट और प्रमुख शोधकर्ता मासात्सुगु टोयोटा ने बताया, 'यह इमेजिंग तकनीक हर किसी को यह बताने के लिए एक बहुत शक्तिशाली उपकरण है कि पौधे बहुत संवेदनशील हैं.'


चेतावनी की एक खामोश पुकार
पौधे एक-दूसरे से बात करने के लिए जिस तरह के रसायनों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें वाष्पशील ऑर्गेनिक कंपाउंड कहा जाता है. ये कंपाउंड स्टोमेटा नामक छिद्रों के माध्यम से स्वस्थ पौधों में प्रवेश करते हैं, और पूरे पत्ते में यात्रा करते हुए, पौधे के चारों ओर जानकारी फैलाते हैं.


'पौधे बहुत संवेदनशील होते हैं'
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक इस अध्ययन के दौरान कुछ पौधों को नुकसान पहुंचाया गया. हालांकि शोधकर्ताओं ने वैज्ञानिक तरीके से ऐसा किया. 


टोयोटा ने कहा कि यह कम्युनिकेशन सिस्टम अविश्वसनीय रूप से वैस ही है जैसा हम जानवरों में देखते हैं, लेकिन सेलुलर लेवल पर. सूचना और संचार का तरीका अलग-अलग है. लेकिन एक बार जब पौधों को मैसेज प्राप्त हुआ, तो इससे कैल्शियम सिग्नलिंग की तरंगें शुरू हो गईं, जो कि पशु कोशिकाओं के एक दूसरे के साथ संवाद करने के समान है.यहां तक कि मानव कोशिकाएं भी एक दूसरे से बात करने के लिए कैल्शियम सिग्नलिंग का उपयोग करती हैं. 


टोयोटा ने कहा कि वह चाहते हैं कि लोग उन पौधों की देखभाल करें जिनके साथ वे बातचीत करते हैं. उन्होंने कहा, 'पौधे पर्यावरण में विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाओं को महसूस कर सकते हैं. वे सूंघ सकते हैं और वे स्पर्श महसूस कर सकते हैं, और वे एक-दूसरे के साथ संवाद कर सकते हैं.'  उन्होंने कहा, 'मैं वास्तव में चाहता हूं कि हर कोई, खासकर बच्चे, यह समझें कि पौधे बहुत संवेदनशील होते हैं. कृपया बाहर के सभी पौधों के प्रति नम्र रहें.'