Kisan Andolan Update: अपनी मांगों को लेकर किसानों का प्रदर्शन जारी है. राजधानी दिल्ली के कई सीमाओं पर पिछले कई दिनों से किसान डटे हुए हैं. अब किसान लीडर सरवन सिंह पंढेर और जगजीत सिंह दल्लेवाल ने रविवार, 5 मार्च को ऐलान किया. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी किसान 10 मार्च को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक देशव्यापी 'रेल रोको' के साथ अपना आंदोलन को फिर से शुरू करेंगे. किसान नेताओं ने कहा कि प्रदर्शनकारी किसान, जो पंजाब और हरियाणा के बीच सीमा बिंदुओं पर डेरा डाले हुए हैं, 6 मार्च को "शांतिपूर्ण तरीके" से दिल्ली की ओर मार्च करना शुरू करेंगे.


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पंढेर और दल्लेवाल पंजाब के बलोह गांव में इसकी घोषणा की. उन्होंने कहा कि किसान मौजूदा विरोध बिंदुओं पर अपना आंदोलन तब तक तेज करेंगे जब तक कि केंद्र उनकी मांगें नहीं मान लेता. पंधेर ने कहा, "दूर-दराज के राज्यों के किसान, जो ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर नहीं पहुंच सकते, उन्हें ट्रेनों और ट्रान्सपोर्टेशन के दूसरे साधनों से दिल्ली जाना चाहिए. यह भी साफ हो जाएगा कि क्या सरकार उन किसानों को एंट्री की इजाजत देती है जो बिना ट्रैक्टर ट्रॉली के जाते हैं. शंभू और खनौरी में एहतजाज पहले की तरह जारी रहेगा और इसे और तेज किया जाएगा. मांगें पूरी होने तक ये जारी रहेगा."


अपने हक के लिए लड़ाई जारी रखेंगे; किसान नेता
किसान नेता ने आग कहा कि पंजाब की सभी पंचायतों को किसानों की मांगों के सपोर्ट में एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए. उन्होंने कहा सेंट्रल गवर्नमेंट किसानों के 'दिल्ली चलो' मार्च को रोकने के लिए "सभी हथकंडे" अपना रहा है. किसान नेता ने पीटीआई के हवाले से कहा, "केंद्र यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहा है कि मौजूदा आंदोलन पंजाब तक ही सीमित है और लड़ाई सिर्फ दो मंचों के नेतृत्व में है. लेकिन हम यह साफ करना चाहते हैं कि देश में 200 से ज्यादा संगठन दोनों मंचों का हिस्सा हैं. यह धारणा बनाई जा रही है कि इलेक्शन के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने पर आंदोलन खत्म हो सकता है, जो एक प्रतिशत भी सही नहीं है. हमें आज, कल लड़ना पड़ सकता है, लेकिन हम अपने अधिकारों के लिए लड़ना जारी रखेंगे."
  
किसानों की ये है मांग?
बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा समेत 200 से ज्यादा किसान संघों द्वारा 'दिल्ली चलो' मार्च 13 फरवरी को शुरू हुआ, ताकि केंद्र सरकार पर अपनी मांगों को स्वीकार करने के लिए दबाव डाला जा सके. जिसमें एमएसपी की गारंटी देने वाले कानून की मांग समेत किसानों के द्वारा रखे गए शर्त जो उन्होंने साल 2021 में रखी थी जब वे अब निरस्त किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ अपना आंदोलन वापस लेने पर सहमत हुए थे और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन और कृषि लोन माफी की भी मांग शामिल हैं.