मोरबीः गुजरात में मोरबी पुल हादसे (Morbi bridge collapse) के मामले में अतिरिक्त लोक अभियोजक ने एक एक एसा खुला किया है, जिसे सुनकर वहां लोग मौजूद सन्न रह गए. लोक अभियोजक के मुताबिक, ओरेवा कंपनी के मुल्जिम प्रबंधकों में से एक ने केबल पुल टूटने के हादसे को भगवान की मर्जी बताया था. अतिरिक्त लोक अभियोजक, एडवोकेट एचएस पांचाल ने कहा, “ओरेवा कंपनी के दो प्रबंधकों में से एक (जिन्हें गिरफ्तार किया गया है) ने अदालत को बताया कि यह 'ईश्वर की मर्जी’ (Act of God) है.“ प्रारंभिक जांच में पासा गया है कि पुल के केबल तार आम जनता के लिए खोले जाने की हालत में बिल्कुल नहीं थे. तार में 'जंग’ लगा हुआ था. 


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बिना निविदा के कंपनी को दिया गया था ठेका 
”एडवोकेट एचएस पांचाल ने बताया कि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट में, जांच अफसर (आईओ) ने कहा है कि केबल (पुल का) जंग खा रहा था. जांच अधिकारी ने दावा किया है कि पुल पर सिर्फ रंग-रोगन चढ़ाया गया था, जबकि जंग लेगे केबलों को नहीं बदला गया था. उनकी ग्रीसिंग भी नहीं की गई. एफएसएल अधिकारी का कहना है कि पहली नजर में यह एक पुराना केबल था. बुधवार को पुलिस हिरासत में भेजे गए आरोपियों के बारे में पूछे जाने पर, पांचाल ने कहा, “जिन 4 लोगों को पुलिस हिरासत में भेजा गया था, उनमें से दो ओरेवा कंपनी के प्रबंधक हैं और दो अन्य ने पुल की मरम्मत का काम किया था. सुरक्षाकर्मी और टिकट विक्रेता को अभी न्यायिक हिरासत में रखा गया है. रिपोर्ट में, जांच अधिकारी (आईओ) ने कहा है कि निविदा प्रक्रिया नहीं हुई थी और अनुबंध सीधे आवंटित किया गया था.“


सात माह तक मरम्मत के लिए बंद रहा पुल
उल्लेखनीय है कि गुजरात की मोरबी अदालत ने 30 अक्टूबर को 140 साल पुराने पुल के ढहने, 143 लोगों की मौत के मामले में गिरफ्तार किए गए नौ लोगों में से चार लोगों को पुलिस हिरासत में और शेष पांच को 5 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. पुलिस हिरासत में चार व्यक्तियों में से दो ओरेवा कंपनी के प्रबंधक हैं, जिसने सात महीने के रखरखाव के काम के बाद पुल को आगंतुकों के लिए खोल दिया, और अन्य दो निर्माण कार्य ठेकेदार के लोग हैं.

पांच सदस्यीय समिति का गठन 
मोरबी के एसपी राहुल त्रिपाठी ने कहा, “हम अपनी हिरासत में सभी चार आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं और हम पुल के नवीनीकरण में विभिन्न प्रकार की खामियों के दायित्व को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. हम गहन जांच कर रहे हैं, और अगर किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया जाएगा.“ उन्होंने आगे कहा, “हां, हमने अदालत को एक वैज्ञानिक रिपोर्ट दी है, लेकिन उसका विवरण इस स्तर पर आपके साथ साझा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे हमारी जांच में बाधा आएगी.“ इससे पहले गुजरात सरकार ने पुल गिरने की घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था.

लापता लोगों को अभी भी खोज रही है एनडीआरएफ की टीम 
गौरतलब है कि इतवार को मोरबी शहर में एक केबल सस्पेंशन पुल के ढह जाने से माच्छू नदी में लोगों के गिरने से महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 143 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक घायल हो गए, जिनका इलाज चल रहा है. मच्छू नदी में खोज और बचाव अभियान अभी भी जारी है. एनडीआरएफ की 5 टीमें यहां काम कर रही हैं.

आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा मोरबी बार एसोसिएशन
मोरबी बार एसोसिएशन ने बुधवार को कहा कि इसके सदस्य मच्छु नदी पर बना केबल पुल टूटने के मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे. वरिष्ठ अधिवक्ता ए.सी. प्रजापति ने कहा, “मोरबी बार एसोसिएशन और राजकोट बार एसोसिएशन ने उनकी पैरवी नहीं करने का फैसला लिया है। दोनों बार एसोसिएशनों ने यह प्रस्ताव पास किया है.” एक और वकील ने कहा, “एसोसिएशन के सभी वकील त्रासदी से बहुत दुखी हैं. नैतिकता के आधार पर यह फैसला लिया गया है। हम पुल गिरने में कई बेकसूर लोगों के मारे जाने के बाद, अदालत में किसी भी आरोपी का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे.” 


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