असम सरकार की नई टैक्स पालिसी, जिसके तहत सार्वजनिक रैलियों, सार्वजनिक बैठकों या यहां तक कि बिहू जैसे उत्सव कार्यक्रमों पर भी टैक्स लगा दिया गया है, ने आम लोगों को नाराज कर दिया है. इसे में सरकार द्वारा लगाए गए टैक्सों के की वजह से मुस्लिम समुदाय ने भी अपनी नारजगी जाहिर की है, और कहा है कि उन्हें भी इस नयी टैक्स पालिसी से कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं. 


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गौरतलब है कि असम सरकार द्वारा लाई गयी नयी टैक्स पालिसी को लेकर मुस्लिम समुदाय को भी बहुत सी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि एस नयी पालिसी के मुताबिक, अगर कहीं प्रोग्राम रखा जाएगा, उसमें भी टैक्स दिया जयेगा. अगर कहीं लोग ज्यादा इकट्ठा होंगे तब भी टैक्स देना पड़ेगा. इसे में सामूहिक इस्लामी जलसे जिसे उर्स मुबारक कहते हैं, के दौरान भी जैसे अगर  परमिशन मांगा जाएगा, तो भी सरकार को टैक्स देना पड़ेगा. इसीलिए कुछ उर्स मुबारक में जहां तीन रोज हुआ करता था, उसको बदल कर एक रोज किया जा रहा है. साथ ही साथ जहां इस्लामी जलसा या इज्तेमा होती है, वहां पर भी काफी परेशानी हो रही है .


इसी बात पर जमीयत उलेमा ए हिंद असम के एक्जीक्यूटिव और कामरूप जमीयत के सदर तथा गुवाहाटी हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट जुनैद खालिद ने जी सलाम से बातचीत के दौरान कहा कि मुसलमान को इन टैक्सों से काफी नुकसान हो रहा है. इसका समाधान सरकार को निकलना चाहिए.  
बातचीत के दौरान एडवोकेट जुनैद खालिद ने यह भी कहा कि यह जो असम सरकार ने टैक्स लगाया है, यह संपूर्ण गैरकानूनी है. यह असंवैधानिक है, क्योंकि भारत में हर समुदाय को अपने धर्म के  रिलिजियस प्रोग्राम में ज्यादा से ज्यादा लोगों की शामिल करने का हक है. इसके लिए किसी से परमिशन लेने की आवशयकता नही होनी चाहिए. इसीलिए असम सरकार का यह फैसला गैरकानूनी है.


क्या-क्या मुश्किलों का करना पड़ है सामना
जुनैद खालिद ने साफ तौर से कहा कि असम में उर्स मुबारक में सबसे ज्यादा  गैदरिंग होती है. अगर उस पर भी परमिशन लेना जरूरी होगा और टैक्स भी देना भी ज़रूरी होगा तो जितने ज्यादा लोग होंगे, उतना ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा. इस वजह से लोग उर्स में आना भी नही चाहेंगे. इतना ही नही इसे कई  बड़े-बड़े जलसे होते हैं, जहां पर असम के अलावा भारत के अन्य राज्य के लोग भी शामिल होते हैं.  कुछ-कुछ जलसे में भारत के इलावा दूसरे देशों से भी लोग आते हैं. इसमें बहुत ज्यादा लोग जमा होते हैं. अगर उस पर भी टैक्स लागू किया जायेगा तो इसे प्रोग्राम धीरे-धीरे बंद ही हो जाएंगे. एडवोकेट जुनैद खालिद ने यह भी कहा कि असम सरकार ने कैबिनेट के फैसले से यह नया टैक्स का कानून लगाया है. इसको सिर्फ कोर्ट में ही चैलेंज किया जा सकता है .उसके बाद कोर्ट का ऑर्डर आने से ही इस टैक्स बंद किया जाएगा.


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