जयपुरः ऐसे वक्त में जब दिल्ली में श्रद्धा वॉकर के मर्डर ने पूरे मुल्क को झकझोर कर रख दिया है, हम ऐसे ही मामलों पर नजर डालते हैं, जिसने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया था. हम आपको जोधपुर, अजमेर और सोडाला की वारदातों के बारे में तफसील से बताते हैं.


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केस संख्या- 1.  जोधपुर


सबसे पहले जोधपुर का मामला- इस मामले में, एक औरत ने अपने पति को काट डाला और उसके जिस्म के टुकड़ों को गटर में फेंक दिया. यह मामला 2020 का था. मृतक की बीवी किसी दूसरी औरत के साथ समलैंगिक संबंध में थी. तब उसने अपनी दो बहनों की मदद से अपने पति, राजस्थान सरकार के सहायक कृषि अधिकारी, को इलेक्ट्रिक कटर से काट डाला था. 
मृतक चरण सिंह उर्फ सुशील राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता कस्बे के निवासी थे. उन्होंने 2013 में सीमा नाम की महिला से शादी की थी. शादी के सात साल तक, सीमा ने जोधपुर में चरण सिंह के साथ उनके घर में रहने के लिए जाने से इनकार कर दिया था. यहां तक कि इस दरमियान उसने उसे अपने पति को अपने करीब भी नहीं आने दिया था. इसके बाद चरण सिंह ने अपनी पत्नी पर ससुराल आने का दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद उसने अपनी बहनों के साथ मिलकर साजिश रची. महिला के पति को उसकी एक बहन के घर बुलाया गया, जहां उसने उसे नशीला पदार्थ पिलाया और फिर बिजली के कटर से उसके हाथ-पैर काटकर पॉलीथिन बैग में पैक कर नाले में फेंक दिया. 
पूछताछ में पता चला कि लंबे अरसे से सीमा के कई लड़कियों से समलैंगिक संबंध थे. जब पति चरण सिंह ने घर आने की जिद की तो सीमा ने इस तरह की हरकत कर दी. चरण सिंह अपनी पत्नी के साथ संबंध बनाना चाहता था, लेकिन सीमा ने कभी उसे अपने पास फटकने नहीं दिया. इस बात पर दोनों के बीच काफी झगड़ा भी हुआ था. 10 अगस्त को सीमा ने बनाड़ थाना क्षेत्र में अपनी बहन के किराए के मकान में चरण सिंह को बुलाया था. यहां सीमा की बहनों ने उसे नशीला जूस पिलाया और इंजेक्शन भी लगाए थे. चरण सिंह के बेहोश होने के बाद सीमा और उसकी बहनों ने चरण सिंह को टुकड़ों में काटकर फेंक दिया था.


जोधपुर पुलिस ने इस चरण सिंह की सनसनीखेज मर्डर का पदार्फाश किया, जिसके शरीर के अंग 12 अगस्त को शहर के एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास तैरते पाए गए थे. पुलिस ने मर्डर के सिलसिले में सीमा, उसकी दो बहनों और उनके कॉमन फ्रेंड को गिरफ्तार किया था. दरअसल, स्थानीय लोगों ने ही ट्रीटमेंट प्लांट के पास अलग-अलग सीवरेज लाइनों में शरीर के कटे हुए हिस्सों को तैरते हुए देखकर पुलिस को सूचना दी थी. 
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने टीमें गठित कर पूरे प्रदेश में लापता लोगों की जानकारी जुटाई थी. जांच के दौरान, पुलिस ने पाया कि चरण सिंह चौधरी गायब था. जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल के पास से मृतक की बाइक भी मिली थी. पुलिस को पता चला कि दो लड़कियां आई थीं और बाइक को मौके पर ही छोड़ गई थीं. शक होने पर पुलिस ने आरोपी मृतक की बीवी और उसकी भाभी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, जिससे पता चला कि इस जोड़े की शादी के बाद से ही अच्छे संबंध नहीं थे. आरोपियों ने घर के अंदर चरण सिंह की हत्या करने और उसके जिस्म को टुकड़ों में काटकर सीवर में फेंकने की बात कबूल की. तत्कालीन डीसीपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि मृतक की पत्नी समलैंगिक थी और उसके किसी दूसरी महिला से संबंध थे.


केस संख्या-2 अजमेर  


ऐसे ही एक दूसरे मामले में 2005 में निधि नाम की एक लड़की ने अजमेर के किशनगढ़ में अपने प्रेमी की मदद से अपने पति भवानी सिंह का सिर कलम कर दिया था. अधिकारियों के मुताबिक, जब उसका बॉयफ्रेंड मौजूद था, तब उसने अपने पति को अपने घर बुलाया. यहां उसने उसका सिर काट दिया और उसका सिर छत पर ले जाकर गैस बर्नर पर जला दिया. शेष हड्डियों को बाद में बनास नदी में फेंक दिया, जबकि उनके शरीर को देवली रोड पर फेंक दिया गया था. पुलिस ने गहन छानबीन के बाद उसे और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया.


केस संख्या -3 सोडाला
ऐसे ही एक तीसरे मामले में 2013 में सोडाला में नीरज सिंह नामक एक शख्स की हत्या कर दी गई थी और उसका सिर रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके साले और उसके साथियों को गिरफ्तार किया था. जब उससे पूछताछ की गई तो उसने कहा कि नीरज ने उसे आपत्तिजनक हालत में देखकर थप्पड़ मारा था, इसलिए उसने थप्पड़ का बदला लेने के लिए उसकी हत्या कर दी.


प्रियजनों से न रखे नाराजगी, लेते रहे खोज खबर 
जयपुर में मनोचिकित्सक आलोक त्रिपाठी ने कहते हैं, ’’किसी को भी अपने परिवार के सदस्यों को अकेला महसूस नहीं होने देना चाहिए, चाहे कुछ भी हो जाए. उन्होंने कहा, श्रद्धा के माता-पिता ने उसे अपने हाल पर छोड़ दिया, जिससे मुल्जिम को उसे मारने की हिम्मत आई होगी. लोगों को अपने प्रियजनों को अपने पास रखना चाहिए. ऐसे अपराध करने वाले लोग विकृत हैं, जो मानसिक रूप से बीमार हैं. वह प्यार की भाषा नहीं समझते हैं.


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