नई दिल्लीः पैगंबर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर नुपूर शर्मा को गिरफ्तार करने की मांग पर कुवैत में धरना और प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ वहां की सरकार ने सख्त कदम उठाया है. कुवैत सरकार ने ऐसे लोगों को नौकरी से निकाल दिया है और उनमें से कई लोगों को हिरासत में भी ले लिया है. इन लोगों को सरकार अब स्वदेश भेजने की तैयारी कर रही हैं और इन्हें दुबारा कुवैत में कभी काम न मिले इसके लिए उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की भी कार्रवाई कर रही है.

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तीन देशों के हैं नागरिक
धरना देने वालों में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग बताए जा रहे हैं. इनमें से अधिकांश लोग लेबर क्लास या फिर तीसरे दर्जे के कर्मचारी हैं. उल्लेखनीय है कि कुवैत में किसी को धरना-प्रदर्शन देने की इजाजत नहीं होती हैं. वहां के कानून के मुताबिक यह अपराध माना जाता है. इससे पहले सउदी अरब ने भी पाकिस्तानी नागरिकों को ऐसे किसी भी तरह के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने पर चेतावनी दी थी. 

भारत में भी विरोध में धरना-प्रदर्शन 
गौरतलब है कि प्रोफेट के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने पर भाजपा ने अपनी एक पूर्व नेता नुपूर शर्मा और नवीन जिंदल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. सरकार ने यह कदम उस वक्त उठाया था जब मध्यपूर्व के लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा मुस्लिम देशों ने नुपूर शर्मा के बयान पर ऐतराज जताया था. हालांकि दोनों नेताओं को पार्टी से निकालने और उनके माफी मांगने के बाद भी भारत के कुछ मुसलमान नुपूर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग को लेकर अपना विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. शुक्रवार को देश के दर्जन भर से अधिक शहरों में इसे लेकर हिंसक झड़पें भी हुई. इसमें दो लोगों की मौत भी हो चुकी हैं. इसके बाद पुलिस ने 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है. 


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