Rajasthan Pride: पति की याद में चूरू में बनवाया ताजमहल, आगरा के 'ताज' से कम नहीं इसके बनने की कहानी
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Rajasthan Pride: पति की याद में चूरू में बनवाया ताजमहल, आगरा के 'ताज' से कम नहीं इसके बनने की कहानी

Rajasthan Pride: राजस्थान (Rajasthan) के चूरू में आगरा के ताजमहल (Taj Mahal) की तरह ही एक संगमरमर का ताजमहल बनवाया गया है. इसके लिए राजस्थान के सबसे अच्छे कारीगरों को चुना गया. सेठ हजारीमल (Seth Hazarimal) की याद में बना Churu का ये Taj Mahal आगरा के ताजमहल की कार्बन कॉपी कहा जाता है.

 

Rajasthan Pride: पति की याद में चूरू में बनवाया ताजमहल, आगरा के 'ताज' से कम नहीं इसके बनने की कहानी

Rajasthan Pride: प्यार की खातिर दुनिया में लोगों ने क्या कुछ नहीं किया. आपने इश्क के लिए जान देने वालों से लेकर, अपना सब कुछ लुटाने वालों की कई कहानियां तो बहुत सुनी होंगी, लेकिन आज भी आगरा के ताजमहल (Taj Mahal) को प्यार सबसे प्यारी निशानी के तौर पर देखा जाता है. इसका निर्माण शाहजंहा ने अपनी बेगम मुमताज की याद में करवाया था. दुनिया के इस प्यारे अजूबे से कई लोग प्रेरणा लेते रहे हैं. इन्ही में एक चूरू की महिला हैं, जिन्होंने अपने पति की याद में ताजमहल जैसा ही एक महल तैयार करवाया है. जानिए चूरू की इस प्यार की निशानी के पीछे की कहानी.

पति की याद में बनवाया ताजमहल

बताया जाता है कि राजस्थान का यह ताजमहल चूरू के दूधवाखारा में स्थित है. इस ताजमहल की कहानी भी आगरा के ताजमहल की कहानी तरह ही है. लेकिन इसे यहां की एक महिला ने अपनी पति की याद में बनवाया था. लोग इसे देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं. इसे हू-ब-हू आगरा के ताजमहल की तरह ही तैयार करवाया गया है.

ये है चूरू के ताजमहल के पीछे की कहानी

चूरू जिला मुख्यालय से लगभग 35 किमी दूर, 70 साल पहले इस भव्य भवन को को सेठ हजारीमल (Seth Hazarimal) की धर्मपत्नी सरस्वती देवी और उनके दत्तक पुत्र ने बनवाया था. बनाने वाले ने इसे बिल्कुल ताजमहल की तरह तैयार किया है. बता दें, कि यहां एक बड़ा शिव मंदिर भी है, जहां सावन के महीने में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. 

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संगमरमर के पत्थरों से बना चूरू का ताजमहल

चूरू का ताजमहल संगमरमर के पत्थरों से तायार किया गया है. राजस्थान के कारीगर दुनियाभर में अपनी कलाकारी के लिए मशहूर हैं. बताया जाता है कि सरस्वती देवी ने भवन को बनवाने के लिए राजस्थान के बेहतरीन कारीगरों को चुना, और फिर इसका काम शुरू करवाया. यह भी बताया जाता है कि इसे बनाने में कारीगरों ने कहीं भी बजरी और सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया. चूरू के इस ताजमहल को देखने आने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी धर्मशाला भी बनवाई गई है. 

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